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SSC और रेलवे परीक्षाओं के लिए ‘रक्त’ पर आधारित स्टडी नोट्स

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रक्त अर्थात् रुधिर अर्थात् BLOOD

• रक्त एक तरल संयोजी ऊतक है।
• मानव शरीर में रक्त की मात्रा कुल भार का 7% होता है।
• रक्त का pH मान 7.4 होता है।
• मानव शरीर में औसतन 5-6 लीटर रक्त होता है।
• नर की तुलना में मादा में आधा लीटर रक्त कम होता है।
• यह संक्रमण से भी लड़ता है और तापमान को भी नियंत्रित करता है।

रक्त कोशिकाओं का निर्माण अस्थि-मज्जा(BONE MARROW) में होता है।

लाल कोशिकाएं, सफेद कोशिकाएं और प्लेटलेट्स हड्डियों के मज्जा में विशेष रूप से कशेरुक, पसलियों, कूल्हों, खोपड़ी और उरोस्थि में बनते हैं। ये आवश्यक रक्त कोशिकाएं संक्रमण से लड़ती हैं, ऑक्सीजन का संवहन करती हैं और रक्तस्राव को नियंत्रित करने में मदद करती हैं।

रक्त में चार घटक होते हैं:
1. प्लाज्मा
2. लाल रक्त कोशिकाएं
3. श्वेत रक्त कोशिकाएं
4. प्लेटलेट्स

प्लाज्मा -> रक्त का तरल भाग

इसमें 92 प्रतिशत पानी होता है, जो रक्त की मात्रा का 55 प्रतिशत होता है।

कार्य:

• संतोषजनक रक्तचाप बनाए रखना
• रक्त के थक्के जमने और प्रतिरोधक क्षमता के लिए महत्वपूर्ण प्रोटीन की आपूर्ति का
विस्तार करना।
• सोडियम और पोटेशियम जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के आदान-प्रदान के लिए माध्यम का कार्य करना
• शरीर में एक उचित pH(एसिड-बेस) संतुलन बनाए रखने में मदद करना, जो कोशिका के कार्य के लिए महत्वपूर्ण है।

लाल रक्त कोशिकाएं –> ऑक्सीजन का संवहन करती हैं।

•लाल रक्त कोशिकाएं डिस्क के आकार की कोशिकाएं(disc-shaped cells) होती हैं जिनमें हीमोग्लोबिन होता है।
• हीमोग्लोबिन (हीम=लौह युक्त)
•हीमोग्लोबिन कोशिकाओं को ऑक्सीजन प्राप्त करने और शरीर के सभी हिस्सों से वितरित करने में सक्षम बनाता है, तथा कार्बन डाइऑक्साइड को ऊतकों के माध्यम से बाहर निकालता है।
• इसका जीवन काल 20 दिनों से 120 दिनों तक होता है इसके बाद यकृत में बिलीरुबिन और बाइलीवरडिन नामक पिगमेंट में टूट जाता है।
• इसका विनाश यकृत और प्लीहा में होता है। इसलिए यकृत को RBC की कब्र कहा जाता है।
• वे अस्थि मज्जा में बनते हैं,
• उनके पास कोई केंद्रक नहीं होता है।
•एन.बी. ऑक्सीहीमोग्लोबिन = ऑक्सीजन से परिपूर्ण हीमोग्लोबिन,
•डीऑक्सीहीमोग्लोबिन=कम ऑक्सीजन से युक्त हीमोग्लोबिन

श्वेत रक्त कोशिकाएं -> शरीर की रक्षा करता हैं(लड़ने वाला)

•श्वेत रक्त कोशिकाओं को ल्यूकोसाइट्स भी कहा जाता है
• श्वेत कोशिकाएं संक्रमण से शरीर की रक्षा करती हैं।
• यह रक्तप्रवाह से बाहर निकल सकते हैं और संक्रमण से लड़ने के लिए ऊतकों तक पहुंच सकता हैं।
• यह अच्छे स्वास्थ्य के लिए आवश्यक होता हैं।
• इसका जीवन काल 1 से 2 दिन का होता है।
•श्वेत रक्त कोशिकाओं में नाभिक होते हैं। यह भी अस्थि मज्जा में ही बनते हैं।

प्लेटलेट्स-> थक्के बनने के लिए जिम्मेदार

प्लेटलेट्स वे कोशिकाएं हैं जो हमारे रक्त के भीतर फैलती हैं और क्षतिग्रस्त रक्त वाहिकाओं को पहचान करती हैं उन्हें आपस में जोड़ती हैं।

रक्त का अध्ययन = HEMATOLOGY

रक्त का मुख्य कार्य पूरे शरीर में ऑक्सीजन, कार्बन डाइऑक्साइड, पानी, पोषक तत्व, हार्मोन और अपशिष्ट का परिवहन करना है। रक्त संक्रमण से भी लड़ता है और तापमान को भी नियंत्रित करता है।

रक्त के संघटक(Composition of blood):
1. प्लाज्मा हमारे रक्त का लगभग 54% हिस्सा होता है। इसका 92% हिस्सा पानी होता है।
2. श्वेत रक्त कोशिकाएं और प्लेटलेट्स हमारे रक्त का लगभग 1% भाग होते हैं।
3. लाल रक्त कोशिकाएं हमारे रक्त का लगभग 45% हिस्सा होते हैं।

परिसंचरण तन्त्र(Circulatory System):

हृदय से रक्त का संचार(Circulation of Blood through the heart):

प्रणालीगत शिरा(Systemic Vein) ⇨ शिरा कोटर(Sinus Venosus) ⇨ दायाँ अलिंद(Right Auricle)⇨ दायाँ निलय(Right Ventricle) ⇨ फुप्फुस-धमनी(Pulmonary Artery) ​⇨ फेफड़ा(Lungs)⇨ फुप्फुस-शिरा(Pulmonary Vein)⇨बायाँ अलिंद (Left Auricle)⇨बायाँ निलय(Left Ventricle)⇨ट्रंकस आर्टेरियोसस(Truncus Arteriosus) ⇨प्रणालीगत परिसंचरण(Systemic Circulation)

  • ओस्टिया के माध्यम से हृदय में लौटने से पहले खुला परिसंचरण तंत्र(ओपन सर्कुलेटरी सिस्टम) रक्त को वाहिकाओं से बाहर निकलने की अनुमति देता है। (कोई शिरा शामिल नहीं है)
  • बंद परिसंचरण तंत्र रक्त को रक्त वाहिकाओं को छोड़ने की अनुमति नहीं देते हैं इसमें ऑक्सीजन और पोषक तत्वों का तेज और नियंत्रित वितरण शामिल है जो लंबी अवधि की गतिविधि की अनुमति देता है।

रक्त से सम्बन्धित महत्वपूर्ण बिंदु(Important Points):

➧महाधमनी(Aorta)
शरीर की सबसे बड़ी धमनी। यह ऑक्सीजन युक्त रक्त को हृदय से दूर उन वाहिकाओं तक ले जाता है जो शरीर के बाकी हिस्सों तक पहुँचती हैं।
➧परिकोष्‍ठ(Atria)
हृदय का वह कक्ष, जिनमें रक्त परिसंचरण के बाद वापस आता है।
➧केशिकाएं(Capillaries)
शरीर की सबसे छोटी रक्तवाहिनियाँ। ऑक्सीजन और ग्लूकोज केशिका की दीवारों से गुजरते हैं और कोशिकाओं में प्रवेश करते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड जैसे अपशिष्ट उत्पाद कोशिकाओं से केशिकाओं के माध्यम से रक्त से बाहर जाते हैं।
➧कार्डीऐक वाल्व (हृदय वाल्व)Cardiac Valves (Heart Valves)
हृदय के कक्षों के माध्यम से रक्त के परिसंचरण को नियंत्रित करने वाले चार हृदय वाल्वों में से एक।
➧विऑक्सीजनित रुधिर –> ऑक्सीजन से कम परिपूर्ण रक्त।
➧हृदय निलय
हृदय का निचला दायाँ और बायाँ कक्ष
➧इंटरवेंट्रीकुलर सेप्टम
इंटरवेंट्रिकुलर सेप्टम दिल के निचले कक्षों (निलय) को एक दूसरे से अलग करने वाली कठोर भित्ति होती है।
➧फेफड़ा
वक्ष-स्थल के अंगों का एक युग्म जो शरीर को ऑक्सीजन की आपूर्ति करती है और शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड को निकालता है।
➧ मध्यह् दत्स्तर अर्थात् मायोकार्डियम(Myocardium)
हृदय का पेशी; मानव हृदय की बाहरी दीवार बनाने वाली तीन परतों में से मध्य वाला।
➧ऑक्सीजनित रुधिर(Oxygenated Blood) -> ऑक्सीजन से समृद्ध रक्त

➧फुफ्फुसीय धमनी
फुफ्फुसीय धमनी और इसकी शाखाएं कार्बन डाइऑक्साइड (और ऑक्सीजन की कमी) से भरपूर रक्त को केशिकाओं तक पहुंचाती हैं जो वायु थैली को घेरे रहती हैं।➧फुफ्फुसीय परिसंचरण
फेफड़ों के माध्यम से रक्त का परिसंचरण।
➧फुफ्फुसीय शिरा
शिराएं फेफड़ों से ऑक्सीजन युक्त रक्त को हृदय के बाएं आलिंद में पहुँचाती हैं।
➧सुपीरियर वेना कावा(Superior Vena Cava)
वह बड़ी शिरा जो रक्त को सिर, गर्दन, हाथ और छाती से हृदय तक ले जाती है।
➧वेना कावा(Vena Cava)
वह बड़ी नस जो सिर, गर्दन और हाथ-पांव से हृदय तक रक्त वापस लाती है।
➧एंडोथेलियम रक्त वाहिकाओं की सबसे भीतरी परत होती है जिसमें कोशिकाओं की केवल एक परत होती है।
➧शिरा वह रक्त वाहिकाएं होती हैं जो रक्त को हृदय तक एक समान प्रवाह में ले जाती हैं। उनके पास बड़ी लुमेन और वाल्व वाली पतली दीवारें होती हैं।
• मानव परिसंचरण तंत्र में प्रणालीगत और फुफ्फुसीय दो सर्किट होते हैं।
• कोरोनरी धमनी रक्त को महाधमनी से हृदय की मांसपेशियों तक ले जाती है। (कोरोनरी नस)
• यकृत धमनी रक्त को यकृत तक ले जाती है। (यकृत नस)
• वृक्क धमनियां रक्त को वृक्क तक ले जाती हैं। (वृक्क नस)
• मेसेंटेरिक धमनियां रक्त को छोटी और बड़ी आंतों तक ले जाती हैं।
• कैरोटिड धमनियां सर को रक्त की आपूर्ति करती हैं।
• अधोजत्रुक धमनी बाजुओं को रक्त की आपूर्ति करती हैं।
• श्रोणि धमनी रक्त को पैरों तक ले जाती हैं।
• एक पोर्टल प्रणाली एक अंग या ऊतक में केशिकाओं का एक नेटवर्क है जो शिरा या नसों के माध्यम से दूसरे अंग या ऊतक में केशिकाओं के दूसरे नेटवर्क से जुड़ा होता है।
• नाड़ी धमनी का वैकल्पिक संकुचन और ढील है, जब रक्त इससे होकर गुजरता है।
• रक्तचाप वह बल है जो रक्त रक्त वाहिकाओं की दीवारों पर लगाता है।
• रक्तदाब मापने के लिए रक्तदाबमापी(sphygmomanometer) का उपयोग किया जाता है (सामान्यतः 120/80 mmHg)
• एथेरोस्क्लेरोसिस वसा के जमाओं के कारण धमनी की दीवारों का सख्त होना है।
• धूम्रपान करने से हृदय गति और रक्तचाप बढ़ जाता है। संतृप्त वसा में उच्च आहार रक्तचाप और एथेरोस्क्लेरोसिस को बढ़ाता है। व्यायाम निम्न रक्तचाप में मदद करता है।

➽रक्तदाता और रक्त प्राप्तकर्ता(BLOOD DONOR AND RECEIVER)

➠रक्त प्रकार विरासत में मिलते हैं।

➧रक्त समूहन(Blood Groupings)
•रक्त समूहन के जनक: कार्ल लैंडस्टैनर(Karl Landsteiner)
• उन्होंने A, B और O ब्लड ग्रुप की खोज की
डेकास्टेलो और स्टर्ल(Decastello and Sturle) ने AB रक्त समूहों की खोज की।

रक्त समूह   रक्त दे सकता हैं      रक्त ले सकता हैं
A A AB A, O
B B, AB B, O
AB AB A,B,AB,O
O A,B,AB,O O

➧RH फैक्टर

• यह आरबीसी(RBC) में पाया जाने वाला एक रक्त प्रतिजन(blood antigen) है।
• आरबीसी में आरएच फैक्टर की उपस्थिति के आधार पर कोई व्यक्ति Rh+ या Rh- होता है
• Rh+ वाला व्यक्ति Rh+ और Rh- दोनों से रक्त प्राप्त कर सकता है- लेकिन Rh- वाला व्यक्ति केवल Rh- से ही रक्त प्राप्त कर सकता है।
रक्ताधान तकनीक(Blood transfusion techniques) डॉ. जेम्स ब्लंडेल(Dr. James Blundell) द्वारा विकसित की गई थी।

रोग(DISEASE)

हेमेटोमा: शरीर के ऊतकों के अंदर रक्त का संग्रह हैं। आंतरिक रक्तस्राव अक्सर हेमेटोमा का कारण होता है।

ल्यूकेमिया: रक्त कैंसर का एक रूप हैं, जिसमें श्वेत रक्त कोशिकाएं असामान्य रूप से बढ़ती हैं और रक्त में फैलती हैं। अत्यधिक मात्रा में श्वेत कोशिकाएं शरीर के ऊतकों में जमा हो जाती हैं, जिससे क्षति होती है।

मल्टीपल मायलोमा: ल्यूकेमिया के समान प्लाज्मा कोशिकाओं के रक्त कैंसर का एक रूप हैं। मल्टीपल मायलोमा में एनीमिया, किडनी का फेल होना और रक्त
में कैल्शियम का स्तर उच्च होना आम होता है।

लिम्फोमा: रक्त कैंसर का एक रूप हैं, जिसमें श्वेत रक्त कोशिकाएं लिम्फ नोड्स और अन्य ऊतकों के अंदर असामान्य रूप से वृद्धि करती हैं। बढ़े हुए ऊतक, और रक्त के कार्यों में व्यवधान, अंततः किसी अंग के फैल होने का का कारण बन सकते हैं।

एनीमिया: रक्त में लाल रक्त कोशिकाओं की असामान्य रूप से कमी हैं। इसके
परिणामस्वरुप थकान और सांस फूलने की बीमारी हो सकती है, हालांकि एनीमिया में अक्सर कोई उल्लेखनीय लक्षण नहीं होते हैं।

हेमोक्रोमैटोसिस: रक्त में आयरन के अत्यधिक स्तर के कारण होने वाला एक विकार हैं। आयरन लीवर, अग्न्याशय और अन्य अंगों में जमा हो जाता है, जिससे लीवर की समस्या और मधुमेह हो जाता है।

सिकल सेल रोग: यह एक आनुवंशिक बीमारी हैं जिसमें लाल रक्त कोशिकाएं समय-समय पर अपना उचित आकार खो देती हैं। विकृत रक्त कोशिकाएं ऊतकों में जमा हो जाती हैं, जिससे दर्द और अंग में क्षति होती है।

बैक्टेरिमिया: रक्त का जीवाणु संक्रमण(Bacterial infection) हैं। रक्त संक्रमण गंभीर होते हैं, और इसमें अक्सर अस्पताल में भर्ती होने और नसों में निरंतर एंटीबायोटिक जलसेक की आवश्यकता होती है।

मलेरिया: मच्छरों से फैलने वाला एक परजीवी प्लास्मोडियम द्वारा लाल रक्त कोशिकाओं का संक्रमण हैं।

थ्रोम्बोसाइटोपेनिया: रक्त में प्लेटलेट्स की असामान्य रूप से कमी हैं। गंभीर थ्रोम्बोसाइटोपेनिया से रक्तस्राव हो सकता है।

ल्यूकोपेनिया: रक्त में श्वेत रक्त कोशिकाओं की असामान्य रूप से कमी हैं। ल्यूकोपेनिया संक्रमण से लड़ने में कठिनाई का कारण बन सकता है।

 

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