Home   »   भारत की जनगणना 2011

भारत की जनगणना 2011, देखें विवरण

2011 में भारत की जनगणना एक महत्वपूर्ण राष्ट्रीय गतिविधि थी, जो हर 10 साल में आयोजित की जाती है। यह जनगणना देश की जनसंख्या, उसके वितरण, सामाजिक-आर्थिक स्थिति, और अन्य जनसांख्यिकीय पहलुओं के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान करती है। भारत की जनगणना 2011 ने देश की जनसंख्या की समग्र तस्वीर प्रस्तुत की और यह बताया कि विभिन्न राज्यों, शहरों, और ग्रामीण क्षेत्रों में जनसंख्या किस प्रकार से बंट रही है। इस लेख में, हम भारत की जनगणना 2011 के प्रमुख निष्कर्षों, उनके महत्व, और भारत की सामाजिक और आर्थिक संरचना को समझने के लिए इन आंकड़ों के उपयोग पर चर्चा करेंगे।

भारत की जनगणना का इतिहास

भारत की जनगणना 2011, जनगणना आयुक्त सी. चंद्रमौली द्वारा राष्ट्र को समर्पित भारत की 15वीं राष्ट्रीय जनगणना है, जो 1 मई 2010 को आरम्भ हुई थी। भारत में जनगणना की शुरुआत 1872 में ब्रिटिश वायसराय लॉर्ड मेयो के अधीन पहली बार की गयी तथा सर्वप्रथम बायोमेट्रिक सूचना 2011 में इकट्ठी की गई। भारतीय संविधान की धारा 246 के अनुसार देश की जनगणना कराने की जिम्मेदारी सरकार को दी गयी या संविधान की 7वीं अनुसूची की क्रम संख्या 69 पर अंकित है जनगणना संगठन केंद्रीय गृह मंत्रालय के अधीन कार्य करता है जिसका उच्चतम अधिकारी भारत का महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त होता है यह देश भर में जनगणना संबंधी कार्यों को निर्देशित करता है।

भारत की जनगणना 2011

2011 ईस्वी की जनगणना अर्थात 15वी जनगणना स्वतंत्र भारत की 7वीं जनगणना की शुरुआत महापंजीयक एवं जनगणना आयुक्त के द्वारा 1 अप्रैल 2010 इसमें से हुई है सितंबर 2010 ई. को केंद्रीय मंत्रिमंडल जाति आधारित जनगणना (1931 ई. के बाद पहली बार) की स्वीकृति प्रदान की जो अलग से जून 2011 से सितंबर 2011 ई. के बीच संपन्न हुई थी।

जनगणना के आंकड़ों के अनुसार, धर्म के आधार पर भारत की जनसंख्या है: 80.50% हिंदू; 14.40% मुस्लिम; और, शेष ईसाई, सिख, बौद्ध और जैन हैं। नवीनतम भारतीय जनगणना के परिणाम यह भी दिखाते हैं कि भारत में शहरीकरण की ओर रुझान बढ़ रहा है – 2011 तक देश की कुल शहरी आबादी 31.80% बढ़ी, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में केवल 13.90% की वृद्धि हुई।

2011 तक भारत में लिंग अनुपात (प्रति हजार पुरुषों पर महिलाओं की संख्या) 978 है, जो वैश्विक औसत 999 से कम है। बाल लिंग अनुपात भी 2001 में 950 से घटकर 2011 में 900 हो गया है। भारत की साक्षरता दर 2001 में 64.84% से बढ़कर 2011 में 74.04% हो गई। पुरुषों में साक्षरता दर महिलाओं की तुलना में क्रमशः 82.14% और 65.46% अधिक है।

भारत में, 0-19 वर्ष की आयु के बच्चों का समग्र लिंगानुपात 2001 (950) की तुलना में 2011 में कम (900) था। हालाँकि, राज्यों में व्यापक असमानताएँ हैं – सबसे अधिक बाल लिंग अनुपात 978 गुजरात में पाया जाता है, जबकि सबसे कम बाल लिंग अनुपात 808 चंडीगढ़ में है। साक्षरता दर में ग्रामीण-शहरी अंतर उच्च बना हुआ है और ग्रामीण साक्षरता दर 58.82% की तुलना में शहरी साक्षरता दर 87.14% है।

भारत की जनगणना 2011, राज्यवार

यहाँ 2011 की भारतीय जनगणना के राज्यवार प्रमुख निष्कर्ष दिए गए हैं, जो भारत के विभिन्न हिस्सों की जनसंख्या, लिंग अनुपात, साक्षरता दर, और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को उजागर करते हैं:

भारत की राज्यवार जनगणना 2011
क्र. सं. राज्य जनसंख्या वृद्धि क्षेत्रफल घनत्व लिंग-अनुपात साक्षरता
1 महाराष्ट्र 112374333 15.99 307713 365 929 82.34
2 उत्तर प्रदेश 199,812,341 20.23 240,928 829 912 67.68
3 पश्चिम बंगाल 91,276,115 13.84 88,752 1028 950 76.26
4 बिहार 104,099,452 25.42 94,163 1,106 918 61.80
5 मध्य प्रदेश 72,626,809 20.35 308,252 236 931 69.32
6 तमिलनाडु 72,147,030 15.61 130,060 555 996 80.09
7 राजस्थान 68,548,437 21.31 342,239 200 928 66.11
8 कर्नाटक 61,095,297 15.60 191,791 319 973 75.36
9 आंध्र प्रदेश 84,580,777 10.98 275,045 308 993 67.02
10 गुजरात 60,439,692 19.28 196,244 308 919 78.03
11 केरल 33,406,061 4.91 38,852 860 1084 94.00
12 ओडिशा 41,974,218 14.05 155,707 270 979 72.87
13 असम 31,205,576 17.07 78,438 398 958 72.19
14 झारखंड 32,988,134 22.42 79,716 414 948 66.41
15 पंजाब 27,743,338 13.89 50,362 551 895 75.84
16 छत्तीसगढ़ 25,545,198 22.61 135,192 189 991 70.28
17 दिल्ली 16,787,941 21.21 1,483 11,320 868 67.16
18 हरियाणा 25,351,462 19.90 44,212 573 879 75.55
19 उत्तराखंड 10,086,292 18.81 53,483 189 963 78.82
20 जम्मू और कश्मीर 12,541,302 23.64 222,236 56 889 67.16
21 त्रिपुरा 3,673,917 14.84 10,486 350 960 87.22
22 हिमाचल प्रदेश 6,864,602 12.94 55,673 123 972 82.80
23 मणिपुर 2,855,794 24.50 22,327 128 985 76.94
24 मेघालय 2,966,889 27.95 22,429 132 989 74.43
25 गोवा 1,458,545 8.23 3,702 394 973 88.70
26 नागालैंड 1,978,502 -0.58 16,579 119 931 79.55
27 अरुणांचल प्रदेश 1,383,727 26.03 83,743 17 938 65.38
28 पुदुचेरी 1,247,953 28.08 490 2,547 1037 85.85
29 मिज़ोरम 1,097,206 23.48 21,081 52 976 91.33
30 सिक्किम 610,577 12.89 7,096 86 890 81.42

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार लिंगानुपात

  • भारत में लिंगानुपात – 940 (महिला) / 1000 (पुरुष)
  • सर्वाधिक लिंगानुपात वाले राज्य – केरल (1084), तमिलनाडु (996), आन्ध्र प्रदेश (993), मणिपुर (992), छत्तीसगढ़ (991)
  • न्यूनतम लिंगानुपात वाले राज्य – हरियाणा (878)
  • सर्वाधिक लिंगानुपात वाला जिला – माहे ( पांडुचेरी ) (1176)
  • न्यूनतम लिंगानुपात वाला जिला – दमन (533)

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार साक्षरता

  • भारत की साक्षरता दर – 74.0 %
  • पुरुष साक्षरता दर – 1%
  • महिला साक्षरता दर – 65.5 %
  • न्यूनतम साक्षरता दर वाले राज्य – बिहार (63.8%), अरुणाचल प्रदेश (67%), राजस्थान (67.1%), झारखंड
  • न्यूनतम पुरुष साक्षरता दर वाले राज्य – बिहार (73.4%), अरुणाचल प्रदेश (73.7%), आंध्रप्रदेश (75.6%)
  • सर्वाधिक साक्षरता दर वाले राज्य – केरल (93.9%), मिजोरम (91.6%)
  • सर्वाधिक पुरष साक्षरता दर वाले राज्य – लक्ष्यद्वीप (1%), केरल (96.0%), मिजोरम (93.7%)
  • सर्वाधिक महिला साक्षरता दर वाले राज्य – केरल (0%), मिजोरम (89.4%)
  • न्यूनतम महिला साक्षरता दर वाले राज्य – राजस्थान (52.7%), बिहार (53.3%), झारखंड (56.2%)
  • सर्वाधिक साक्षरता दर वाला जिला – सरचिप (मिजोरम)
  • न्यूनतम साक्षरता दर वाला जिला – अलीराजपुर (म.प्र.)

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार जनसंख्या घनत्व

  • भारत की जनसंख्या घनत्व – 382/ व्यक्ति वर्ग किमी
  • सर्वाधिक घनत्व वाले राज्य – बिहार (1106 / वर्ग किमी), प. बंगाल (1028/ वर्ग किमी), केरल (860/ वर्ग किमी)
  • न्यूनतम घनत्व वाले राज्य – अरुणाचल प्रदेश (17/ व्यक्ति वर्ग किमी)
  • सर्वाधिक घनत्व वाला जिला – उत्तर पूर्व दिल्ली
  • न्यूनतम घनत्व वाला जिला – दिवांग घाटी (अरुणाचल प्रदेश)

भारत की जनगणना 2011 के अनुसार केंद्र शासित प्रदेश

  • सर्वाधिक जनसँख्या वाला केंद्रशासित राज्य – दिल्ली (1.67 करोड़)
  • न्यूनतम जनसँख्या वाला केंद्रशासित राज्य – लक्ष्यद्वीप (47 हजार)
  • न्यूनतम जनसंख्या घनत्त्व वाला राज्य – अण्डमान (46/ वर्ग किमी)
  • सर्वाधिक साक्षरता वाला केंद शासित राज्य – लक्ष्यद्वीप (92.28%)
  • न्यूनतम साक्षरता वाला केंद्रशासित राज्य – दादर एवं नागर हवेली (77.65)

भारत की जनगणना 2011 के प्रमुख निष्कर्ष

2011 की भारतीय जनगणना ने देश के जनसांख्यिकीय परिदृश्य का व्यापक और विस्तृत विश्लेषण प्रस्तुत किया। इस जनगणना से प्राप्त डेटा ने नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, और प्रशासनिक संस्थानों को देश की जनसंख्या, लिंग अनुपात, साक्षरता, शहरीकरण, और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की। यहाँ 2011 की जनगणना के कुछ प्रमुख निष्कर्ष दिए गए हैं:

  • जनसंख्या और वृद्धि दर: 2011 की जनगणना के अनुसार, भारत की कुल जनसंख्या 1.21 बिलियन (121 करोड़) थी। यह 2001 की जनगणना की तुलना में लगभग 17.7% की वृद्धि को दर्शाता है। इस वृद्धि दर ने भारत को दुनिया का दूसरा सबसे अधिक आबादी वाला देश बना दिया।
  • लिंग अनुपात: 2011 की जनगणना में 1000 पुरुषों पर महिलाओं की संख्या 940 थी, जो 2001 के मुकाबले सुधार को दर्शाता है। हालांकि, कुछ राज्यों में लिंग अनुपात चिंताजनक रूप से कम था, जो लिंग असमानता और लैंगिक पक्षपात की ओर इशारा करता है।
  • साक्षरता दर: 2011 में, भारत की साक्षरता दर 74.04% थी, जो 2001 की तुलना में लगभग 8% की वृद्धि को दर्शाता है। पुरुषों की साक्षरता दर 82.14% थी, जबकि महिलाओं की साक्षरता दर 65.46% थी, जिससे लिंग आधारित असमानता का संकेत मिलता है।
  • ग्रामीण और शहरी जनसंख्या: 2011 की जनगणना के अनुसार, 68.84% भारतीय ग्रामीण क्षेत्रों में रहते थे, जबकि 31.16% शहरी क्षेत्रों में। यह शहरीकरण के बढ़ते रुझान को दर्शाता है, जो भारत के आर्थिक विकास और शहरी योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है।
  • अनुसूचित जातियों और जनजातियों की जनसंख्या: अनुसूचित जातियों (SC) का प्रतिशत 16.6% था, जबकि अनुसूचित जनजातियों (ST) का प्रतिशत 8.6% था। यह डेटा सामाजिक न्याय और आरक्षण नीतियों के लिए महत्वपूर्ण है।
  • आवास और बुनियादी सुविधाएँ: 2011 की जनगणना में यह भी पता चला कि 53.2% घर पक्के थे, जो 2001 के मुकाबले सुधार को दर्शाता है। हालांकि, सिर्फ 32.7% घरों में पाइपलाइन के माध्यम से पीने के पानी की सुविधा थी, जो बुनियादी सुविधाओं के मामले में एक चुनौतीपूर्ण स्थिति को उजागर करता है।
  • बहुभाषी और सांस्कृतिक विविधता: 2011 की जनगणना ने भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को भी प्रदर्शित किया। इसमें देश में बोली जाने वाली प्रमुख भाषाओं और धर्मों के बारे में जानकारी दी गई।

भारत की जनगणना 2011 के महत्व

2011 की भारतीय जनगणना का देश के सामाजिक, आर्थिक, और जनसांख्यिकीय परिदृश्य को समझने में महत्वपूर्ण योगदान है। यहाँ 2011 की भारतीय जनगणना के प्रमुख महत्व दिए गए हैं:

  • जनसांख्यिकीय डेटा का स्रोत: 2011 की जनगणना ने देश की जनसंख्या, लिंग अनुपात, साक्षरता, शहरीकरण, और सामाजिक-आर्थिक स्थिति के बारे में व्यापक डेटा प्रदान किया। यह डेटा नीति निर्माताओं, शोधकर्ताओं, और सरकारी योजनाओं के लिए एक प्रमुख स्रोत है।
  • नीति निर्माण और योजना के लिए आधार: जनगणना से प्राप्त जानकारी का उपयोग सरकारी योजनाओं और नीतियों को बनाने के लिए किया जाता है। यह डेटा शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, और सामाजिक कल्याण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण नीतियों के विकास के लिए आधार बनाता है।
  • शहरीकरण और ग्रामीण विकास: 2011 की जनगणना ने भारत में शहरीकरण के रुझान को उजागर किया, जिससे शहरी और ग्रामीण विकास के लिए योजनाओं की आवश्यकता का पता चला। इस डेटा के आधार पर, शहरी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं और सेवाओं की योजना बनाई जा सकती है।
  • सामाजिक न्याय और आरक्षण नीति: जनगणना के डेटा का उपयोग अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों, और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षण नीति के लिए किया जाता है। यह डेटा सामाजिक न्याय और समानता को बढ़ावा देने में मदद करता है।
  • लिंग असमानता और महिला सशक्तिकरण: 2011 की जनगणना ने लिंग अनुपात और महिलाओं की साक्षरता दर पर डेटा प्रदान किया। यह जानकारी महिला सशक्तिकरण और लिंग असमानता को कम करने के लिए नीतियों के विकास में सहायक है।
  • आवास और बुनियादी सुविधाएँ: जनगणना के डेटा का उपयोग आवास और बुनियादी सुविधाओं की योजना बनाने के लिए किया जा सकता है। इससे सरकार को यह समझने में मदद मिलती है कि कहाँ अधिक निवेश और सुधार की आवश्यकता है।
  • सांस्कृतिक और भाषाई विविधता: 2011 की जनगणना ने भारत की सांस्कृतिक और भाषाई विविधता को भी प्रदर्शित किया। यह डेटा देश के विभिन्न समुदायों और उनके भाषाई और धार्मिक अभिविन्यास को समझने में मदद करता है।

Sharing is caring!

FAQs

भारत की जनगणना क्या है?

भारत की जनगणना भारत में लोगों के बारे में जनसांख्यिकीय, आर्थिक और सामाजिक डेटा एकत्र करने, संकलित करने और प्रकाशित करने की प्रक्रिया है।

ब्रिटिश शासन में पहली जनगणना कब शुरू की गई थी?

1757 में, वॉरेन हेस्टिंग्स (गवर्नर-जनरल) द्वारा जन्म और मृत्यु को रिकॉर्ड करने की एक प्रणाली शुरू की गई थी। 1872 में भारत की पहली बार जनगणना हुई।