गुप्त वंश पर स्टडी नोट्स: शासक और महत्वपूर्ण बिंदु पर एक नजर

गुप्त वंश: यह सामान्य जागरूकता के सबसे महत्वपूर्ण सेक्शन में से एक है जो कम से कम समय में एक प्रतियोगी परीक्षा में अधिकतम अंक प्राप्त करने में उम्मीदवार की मदद करता है। आपको सही विकल्प के लिए जटिल गणना करने की आवश्यकता नहीं है, इसलिए इस खंड में अधिकतम स्कोर करने के लिए तथ्यों और आंकड़ों को पहले से तैयार रखना सबसे अच्छा है। यहां हम गुप्त वंश से संबंधित महत्वपूर्ण नोट्स प्रदान कर रहे हैं। गुप्त वंश की शुरुआत श्री गुप्त द्वारा की गई थी, उन्होंने 240 -280 ईस्वी तक शासन किया। उनका पुत्र घटोत्कच (280- 319 ई.) इस साम्राज्य का अगला उत्तराधिकारी था। घटोत्कच का एक पुत्र था, जिसका नाम चंद्रगुप्त (I) (319-335 ई. तक) था। इतिहासकार इस काल को भारत का स्वर्ण युग मानते हैं। आइए गुप्त वंश को विस्तार से देखें।

Ruler Reign
Gupta (c. late 3rd century)
Ghatotkacha (c. late 3rd century – 319)
Chandragupta I (c. 319 – 335/350)
Kacha (early 4th century?)
Samudragupta (c. 335/350 – 375)
(Ramagupta) (late 4th century?)
Chandragupta II (380 – 413/415)
Kumaragupta I (415 – 455)
Skandagupta (455 – 467)
Purugupta (467 – 473)
Kumaragupta II (473 – 476)
Budhagupta (476 – 495)
Narasimhagupta (495 – ?)
(Bhanugupta) (circa 510)
Vainyagupta (circa 507)
Kumaragupta III (circa 530)
Vishnugupta (540 – 550

गुप्तकाल: एक नजर में 

Name Gupta Dynasty
Period 320- 550 AD.
Language Sanskrit (literary and academic); Prakrit (vernacular)
Religion Hinduism, Buddhism, Jainism
Capital Pataliputra

Study Notes On Tughlaq Dynasty: Rulers, Dynasty and a Complete Overview

श्री गुप्त:

  • गुप्त वंश के संस्थापक श्री गुप्त थे।
  • इनका स्थान घटोत्कच ने लिया।
  • इन दोनों को महाराजा कहा जाता था।

चंद्रगुप्त I (320 – 330 ई.):

  • चंद्रगुप्त प्रथम सबसे पहले महाराजाधिराज (राजाओं के महान राजा) कहलाए।
  • उन्होंने लिच्छवियों के साथ बेटी-रोटी का रिश्ता स्थापित किया।
  • उन्होंने उस परिवार की राजकुमारी कुमारदेवी से विवाह किया।
  • महरौली लौह स्तंभ के शिलालेख में उनकी व्यापक विजय का उल्लेख है।
  • चंद्रगुप्त प्रथम को गुप्त युग का संस्थापक माना जाता है जो 320ई. में इनके पदप्राप्ति के साथ शुरू होता है।

समुद्रगुप्त (330-380 ई.)

  • समुद्रगुप्त संभवतः गुप्त वंश के शासकों में सबसे महान थे।
  • इलाहाबाद स्तंभ के शिलालेख समुद्रगुप्त के शासनकाल का विस्तृत विवरण प्रदान करते हैं।
  • समुद्रगुप्त ने दक्षिण भारतीय सम्राटों के विरुद्ध कूच किया।
  • उन्होंने अश्वमेध यज्ञ किया।
  • समुद्रगुप्त ने ‘अश्वमेध को वापस लाने वाले महानायक” के साथ स्वर्ण और चांदी के सिक्के जारी किए।
  • उनकी सैन्य उपलब्धियों के कारण, समुद्रगुप्त को ‘भारतीय नेपोलियन’ के रूप में सम्मानित किया गया था।

चंद्रगुप्त II (380-415 A.D.)

  • समुद्रगुप्त का उत्तराधिकार, उसके पुत्र चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य ने लिया था।
  • बेटी-रोटी के रिश्तों के माध्यम से, चंद्रगुप्त द्वितीय ने अपनी राजनीतिक शक्ति को मजबूत किया।
  • चंद्रगुप्त द्वितीय ने कुबेरनागा से शादी की, वह मध्य भारत की एक नागा राजकुमारी थी।
  • चन्द्रगुप्त द्वितीय की सबसे बड़ी सैन्य उपलब्धियाँ पश्चिमी भारत के शक क्षत्रपों के खिलाफ उसकी लड़ाई थी।
  • अपनी जीत के बाद, इन्होने सकारी नाम प्राप्त की, जिसका अर्थ था, ‘शक का विध्वंसक’। उन्होंने खुद को ‘विक्रमादित्य’ भी कहा।
  • उज्जैन, एक महत्वपूर्ण व्यापारिक शहर और गुप्तों की वैकल्पिक राजधानी था।
  • गुप्त साम्राज्य की महान संपत्ति सोने के सिक्कों की विविधता में प्रकट हुई है।
  • प्रसिद्ध चीनी तीर्थयात्री, फाहियान ने चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान भारत का दौरा किया। फाहियान ने गुप्त साम्राज्य की धार्मिक, सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर बहुमूल्य जानकारी प्रदान की।

कुमारगुप्त:

  • कुमारगुप्त चंद्रगुप्त द्वितीय का पुत्र और उत्तराधिकारी था।
  • कई सिक्कों को जारी किया गया था और उसके शिलालेख पूरे गुप्त साम्राज्य में पाए जाते हैं।
  • कुमारगुप्त ने भी एक अश्वमेध यज्ञ  किया था।
  • कुमारगुप्त ने नालंदा विश्वविद्यालय की नींव रखी जो अंतर्राष्ट्रीय प्रतिष्ठा का संस्थान बनकर उभरा।
  • शक्तिशाली समृद्ध जनजाति जिसे ‘पुष्यमित्र’ कहा जाता है, ने इनके शासनकाल के अंत में गुप्त सेना को हराया था।

स्कन्दगुप्त:

  • मध्य एशिया के हूणों की एक शाखा ने हिंदुकुश पर्वतों को पार करने और भारत पर आक्रमण करने के प्रयास किए।
  • स्कंदगुप्त जिन्होंने वास्तव में हूण आक्रमण का सामना किया था।
  • उसने हूणों के खिलाफ सफलतापूर्वक लड़ाई लड़ी और साम्राज्य को बचाया।

याद रखने वाले महत्वपूर्ण बिंदु:

  • गुप्त काल में कला, विज्ञान और साहित्य के क्षेत्र में जबरदस्त प्रगति हुई और इसके कारण इसे “स्वर्ण युग” कहा गया।
  • झांसी के पास देवगढ़ में मंदिर और इलाहाबाद के पास गढ़वा में मंदिर में मूर्तियां गुप्त कला का महत्वपूर्ण नमूना हैं।
  • स्कंदगुप्त का भितरी अखंड स्तंभ भी उल्लेखनीय है।
  • ग्वालियर के पास बाग की गुफाओं में गुप्त काल के चित्रों को देखा जाता है।
  • श्रीलंका में सिगिरिया की पेंटिंग अजंता शैली से अत्यधिक प्रभावित थीं।
  • गुप्तकालीन सिक्का भी उल्लेखनीय था। समुद्रगुप्त ने आठ प्रकार के सोने के सिक्के जारी किए।
  • चंद्रगुप्त द्वितीय और उसके उत्तराधिकारियों ने विभिन्न किस्मों के सोने, चांदी और तांबे के सिक्के भी जारी किए थे
  • गुप्त काल में संस्कृत भाषा प्रमुख हो गई। सर्वश्रेष्ठ संस्कृत साहित्य गुप्त युग में हुए थे।
  • एक महान कवि समुद्रगुप्त ने हरिसेना सहित कई विद्वानों को संरक्षण दिया था।
  • चन्द्रगुप्त द्वितीय का दरबार प्रतिष्ठित नवरत्नों द्वारा सुशोभित था। उसमें कालिदास सबसे प्रमुख थे।
  • पंचतंत्र की कहानियों की रचना गुप्त काल के दौरान हुई थी।
  •  अपने वर्तमान रूप में पुराणों की रचना इसी काल में हुई थी।
  • वर्तमान रूप में महाभारत और रामायण को लिखा गया था और अंतिम रूप दिया गया था और वर्तमान रूप में लिखा गया।
  • गुप्त काल में गणित, खगोल विज्ञान, ज्योतिष और चिकित्सा के क्षेत्र में एक शानदार गतिविधियों का साक्ष्य रहा है।
  • वराहमिहिर ने पाँच खगोलीय प्रणाली पंच सिद्धान्तिका की रचना की।

सामान्यतः पूछे जाने वाले प्रश्न

Q. किस गुप्त शासक के शासनकाल के दौरान चीनी यात्री फाह्यान भारत आया था?

Ans. फाह्यान ने चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान भारत का दौरा किया।

Q. गुप्त वंश का संस्थापक कौन था?

Ans. गुप्त वंश के संस्थापक श्री गुप्त थे।

Q. महाराजाधिराज कहे जाने वाले पहले राजा कौन थे?

Ans. चंद्रगुप्त प्रथम, महाराजाधिराज कहे जाने वाले पहले शासक थे।

Q. भारतीय इतिहास में किसे भारत के नेपोलियन के रूप में जाना जाता है?

Ans. समुद्रगुप्त को भारत के नेपोलियन के रूप में जाना जाता है

Q. किस गुप्त शासक को सकरी के नाम से जाना जाता है और क्यों?

Ans. चंद्रगुप्त विक्रमादित्य को, क्योंकि उन्होंने शक पर विजय प्राप्त की।

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