Latest SSC jobs   »   Tughlaq Dynasty in Hindi   »   Prithviraj Chauhan Study Notes

पृथ्वीराज चौहान पर स्टडी नोट्स : प्रारंभिक जीवन, युद्ध, विरासत और इससे जुड़े महत्वपूर्ण प्रश्न

Prithviraj Chauhan:  पृथ्वीराज चौहान का जन्म 1166 में अजमेर के राजा, सोमेश्वर चौहान के पुत्र के रूप में हुआ था। वह दिल्ली के सिंहासन पर बैठने वाला चौहान वंश का अंतिम शासक था। उनके पिता की मृत्यु के बाद, पृथ्वीराज चौहान के दादा अंगम ने उन्हें दिल्ली में राज्य के सिंहासन का उत्तराधिकारी घोषित किया। स्वभाव से एक सच्चे राजपूत शासक, पृथ्वी राज ने अपने साम्राज्य का विस्तार मुख्य रूप से उत्तर पश्चिम भारत की ओर किया। इन क्षेत्रों में मुख्य रूप से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के क्षेत्र शामिल थे। यह उन सभी उम्मीदवारों के लिए स्टेटिक GK का एक महत्वपूर्ण विषय है जो सरकारी भर्ती परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं।

Gupta Dynasty

पृथ्वीराज चौहान का प्रारंभिक जीवन

पृथ्वीराज तृतीय, जिसे पृथ्वीराज चौहान के नाम से जाना जाता है, चाह्मान (चौहान) वंश का एक भारतीय राजा था। आरंभ से ही पृथ्वी राज ने सभी सैन्य कौशल सीखकर अपनी तीक्ष्णता और प्रतिभा को दिखाया। यह माना जाता था कि उन्होंने आवाज़ के आधार पर अपने लक्ष्य को हासिल करने के कौशल में महारत हासिल की, जिसे “शब्दभेदी” तकनीक के रूप में जाना जाता है। उन्होंने एक युद्ध में अपने पिता की मृत्यु के बाद, 1179 में, तेरह साल की आयु में अजमेर का सिंहासन प्राप्त किया। दिल्ली के शासक, पृथ्वीराज के दादा अंगम ने पृथ्वीराज चौहान को दिल्ली के सिंहासन का उत्तराधिकारी घोषित किया।

पृथ्वीराज चौहान के युद्ध

चूँकि सिंहासन पर बैठने के समय भी पृथ्वीराज अल्पायु था, इसलिए उसकी माँ कर्पूरादेवी को उसका राज-प्रतिनिधि बना दिया गया। राजा के रूप में पृथ्वीराज के आरंभिक वर्षों के दौरान कर्पूरादेवी, जिन्हें एक राज प्रतिनिधि मंडल द्वारा सहायता प्रदान की गई थी, ने राज्य के प्रशासन का प्रबंधन किया। पृथ्वीराज के ऐतिहासिक युद्ध और 1182 ई. में चंदेल राजाओं पर विजय, उनके खजाने में अपार धन लाने के लिए महत्वपूर्ण थे। लेकिन चंदेल राजा ने पृथ्वी राज से जल्द ही अपने साम्राज्य को वापस प्राप्त कर लिया। इतिहास 1187 ई. में चालुक्यों के साथ हारे हुए युद्ध के बारे में भी बताता है।

Tughlaq Dynasty: Rulers, Dynasty and a Complete Overview

पृथ्वी राज ने तराइन के प्रथम युद्ध में, 1191 में अफगान शासक मोहम्मद गोरी के खिलाफ युद्ध लड़ा और वह विजयी हुआ। उसने मोहम्मद गोरी को मुक्त करने की एक गलती की, जिसने बाद में 1192 में तराइन के दूसरे युद्ध में लड़ने के लिए अपनी सेना को फिर से तैयार किया, मोहम्मद गोरी ने पृथ्वी राज को बंदी बना लिया और उसे अंधा करके यातना दी।

पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु

पृथ्वीराज चौहान को बंदी बनाने के बाद, मुहम्मद गौरी ने उसे अपने जागीरदार के रूप में बहाल किया। यह सिद्धांत इस तथ्य से समर्थित है कि तराइन के युद्ध के बाद पृथ्वीराज द्वारा जारी किए गए सिक्कों में एक तरफ उसका नाम था और दूसरी तरफ मुहम्मद गौरी का नाम था। कई स्रोतों के अनुसार, पृथ्वीराज को बाद में देशद्रोह के लिए मुहम्मद ने मार दिया था। हालांकि, राजद्रोह की प्रकृति भिन्न-भिन्न स्रोतों में भिन्न भिन्न है। अधिकांश मध्ययुगीन स्रोतों का कहना है कि पृथ्वीराज को चाह्मान की राजधानी अजमेर ले जाया गया था, जहाँ मुहम्मद ने उन्हें अपने जागीरदार के रूप में बहाल करने की योजना बनाई थी।

पृथ्वीराज चौहान की विरासत

अपने चरमोत्कर्ष के दौरान, पृथ्वीराज चौहान का साम्राज्य उत्तर में हिमालय की तलहटी से लेकर दक्षिण में माउंट आबू की तलहटी तक फैला हुआ था। बेतवा नदी से लेकर सतलज नदी तक साम्राज्य का विस्तार हुआ। वर्तमान समय में इसका मतलब है कि उनके साम्राज्य में वर्तमान राजस्थान, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तरी मध्य प्रदेश और दक्षिणी पंजाब शामिल थे। पृथ्वीराज चौहान की मृत्यु के बाद, उन्हें बड़े पैमाने पर एक शक्तिशाली हिंदू राजा के रूप में चित्रित किया गया था, जो कई वर्षों तक मुस्लिम आक्रमणकारियों को खाड़ी में रखने में सफल रहा था। मध्ययुगीन भारत में इस्लामी शासन की शुरुआत से पहले उन्हें अक्सर भारतीय शक्ति के प्रतीक के रूप में भी चित्रित किया जाता है।

पृथ्वीराज चौहान : FAQs

Q. तराइन का पहला युद्ध किसके बीच लड़ा गया था?

Ans. पृथ्वीराज चौहान ने इसमें मोहम्मद गौरी को हराया (1191)

Q. पृथ्वीराज रासो किसके द्वारा लिखी गई?

Ans. चंद बरदाई

Q. तराइन के दूसरे युद्ध में किसकी हार हुई?

Ans.पृथ्वीराज चौहान

Q. पृथ्वीराज चौहान को कब दिल्ली के सिंहासन का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था?

Ans. पृथ्वीराज चौहान को वर्ष 1179 में दिल्ली के सिंहासन का उत्तराधिकारी घोषित किया गया था

Sharing is caring!

Thank You, Your details have been submitted we will get back to you.

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *