जानिए क्या है समग्र शिक्षा अभियान के उद्देश्य

समग्र शिक्षा अभियान

समग्र शिक्षा अभियान, प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने का एक कार्यक्रम है। केंद्रीय बजट 2018-19 में प्री-नर्सरी से 12 वीं कक्षा तक बिना विभाजन के स्कूली शिक्षा को समग्र रूप से करने का प्रस्ताव रखा गया था। इसका उद्देश्य स्कूलिंग में सीखने के समान अवसरों के रूप में छात्रों के लिए स्कूल की प्रभावशीलता में सुधार करना और शिक्षण के समान परिणामों को प्राप्त करना है। यह अभियान यह सुनिश्चित करता है कि सभी योजनाओं का उचित कार्यान्वयन देश भर के सभी स्कूलों में किया जाए।

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समग्र शिक्षा अभियान का मुख्य उद्देश्य:

समग्र शिक्षा अभियान के प्रमुख उद्देश्य निम्नलिखित हैं:

  1. छात्रों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करना और उनके सीखने के परिणाम को बढ़ाना
  2. स्कूली शिक्षा में सामाजिक और लिंग-अंतराल के गैप को भरना
  3. स्कूली शिक्षा के सभी स्तरों पर निष्पक्षता और समावेश सुनिश्चित करना
  4. स्कूली प्रावधानों में निर्धारित न्यूनतम मानकों को सुनिश्चित करना;
  5. बेहतर समझ के लिए व्यावहारिक विषयों वाली शिक्षा के व्यावसायिककरण को बढ़ावा देना,
  6. नि: शुल्क और अनिवार्य शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 से बच्चों के अधिकारों के उचित कार्यान्वयन में राज्य की सहायता करना;
  7. SCERT/ राज्य शिक्षा संस्थानों, शिक्षक प्रशिक्षण संस्थानों के सुदृढ़ीकरण और उन्नयन के लिए और शिक्षक प्रशिक्षण के लिए नोडल एजेंसी के रूप में DIET की स्थापना।

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समग्र शिक्षा अभियान की मुख्य विशेषताएं:

शिक्षा का एक समग्र दृष्टिकोण

  • प्री-स्कूल से कक्षा 12 तक स्कूली शिक्षा समग्र होनी चाहिए। स्तरों में इसका विभाजन नहीं होना चाहिए।
  • पहली बार सीनियर सेकेंडरी लेवल और प्री-स्कूल लेवल को जोड़ना

प्रशासनिक सुधार:

  • सुधारों के सामंजस्यपूर्ण कार्यान्वयन के लिए अग्रणी एकल और केंद्रीकृत प्रशासनिक संरचना
  • इस योजना के तहत राज्यों को अपने हस्तक्षेप को प्राथमिकता देने में सहायता के लिए लचीलापन दी गई है।
  • एक एकीकृत प्रशासन ‘स्कूल’ की निरंतरता की देखरेख करेगा।

शिक्षा की गुणवत्ता:

  • इस योजना का विशेष ध्यान स्कूली स्तर पर शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार के लिए दो T- टीचर्स एंड टेक्नोलॉजी(Teachers and Technology) पर केंद्रित है।
  • शिक्षकों और स्कूल प्रधानाध्यापकों के कैपसिटी निर्माण और सीखने को प्रोत्साहित करना।
  • SCERT और DIET जैसे शिक्षक शिक्षा(Teacher Education) संस्थानों को मजबूत करने पर ध्यान देना ताकि सिस्टम में भावी शिक्षकों की गुणवत्ता में सुधार हो।
  • स्कूलों में विज्ञान और गणित सीखने को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय अभियान को समर्थन दिया जाएगा।
  • प्राथमिक स्तर पर मूलभूत कौशल विकसित करने के लिए “पढ़े भारत, बढ़े भारत” प्रोग्राम को सहयोग देना
  • प्रत्येक स्कूल के लिए 5000रु. से 20000रु. तक के पुस्तकालय अनुदान का प्रावधान।

डिजिटल शिक्षा संबंधी मुख्य बातें:

  • टेक्नोलॉजी आधारित शिक्षण कक्षाओं की मदद से शिक्षा आधारित क्रांति को आसानी से समझने के लिए सभी माध्यमिक विद्यालयों में “ऑपरेशन डिजिटल बोर्ड’ की सहायता करना,
  • स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल बोर्ड और DTH चैनलों के माध्यम से स्कूली शिक्षा में डिजिटल प्रौद्योगिकी के प्रयोग को बढ़ावा देना।
  • UDISE+, Shagun जैसी डिजिटल पहल मजबूत करना।
  • अपर प्राइमरी से हायर सेकंड्री तक के स्कूलों में ICT के बुनियादी ढांचे को मजबूत करना।

विद्यालयों का सुदृढ़ीकरण:

  • I से VIII तक सभी वर्गों के बच्चों को परिवहन सुविधा।
  •  कम्पोजिट स्कूल ग्रांट को 14,500-50,000रु. से बढाकर 25,000- 1 लाख किया जायेगा और इसे स्कूल नामांकन के आधार पर आवंटित किया जायेगा।
  • “स्वच्छ विद्यालय” को सपोर्ट करने के लिए स्कूल में होने वाली स्वच्छ्ता गतिविधियों के लिए विशिष्ट प्रावधान
  • सभी सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की गुणवत्ता में सुधार करना।

बालिका शिक्षा:

  • कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) का कक्षा 6-8 के स्थान पर कक्षा 6-12 तक अपग्रेडेशन।
  • अपर प्राइमरी से सीनियर सेकेंडरी स्तर तक की लड़कियों को आत्मरक्षा की ट्रेनिंग दी जानी चाहिए।
  • बालिका शिक्षा पर फोकस करने के लिए ‘बेटी बचाओ बेटी पढाओ’ के लिए प्रतिबद्धता।

स्किल डेवलपमेंट :

  • अपर प्राइमरी लेवल(Upper Primary Level) पर व्यावसायिक कौशल या व्यावहारिक ज्ञान का की पहुँच को बढ़ाना।
  • कक्षा 9-12 के लिए व्यावसायिक शिक्षा को पाठ्यक्रम के साथ समन्वित किया जाना चाहिए और छात्रों को उद्योग उन्मुख(industry oriented) शिक्षा दी जानी चाहिए।
  • कौशल विकास ’पर जोर देना।

खेल और शारीरिक शिक्षा:

  • खेल शिक्षा(Sports Education) को पाठ्यक्रम का अभिन्न अंग बनाया जाना चाहिए।
  • खेलों की प्रासंगिकता को बढ़ाने पर बल देने के लिए प्रत्येक विद्यालय को खेल उपकरण उपलब्ध करायी जाएगी। जिसमें प्राथमिक विद्यालयों के लिए 5000रु., अपर प्राइमरी लेवल(Upper Primary Level) विद्यालयों के लिए 10,000रु. और माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालयों के लिए 25,000 रु. तक की राशि दी जाएगी।

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क्षेत्रीय संतुलन (Regional Balance) पर फोकस:

  • संतुलित शैक्षिक विकास को बढ़ावा देना।
  • नीति आयोग द्वारा निर्धारित शैक्षिक रूप से पिछड़े ब्लॉक (EBB),LWE प्रभावित जिले, SFD, सीमावर्ती क्षेत्र और 117 आकांक्षात्मक जिलों को महत्व देना।

समग्र शिक्षा अभियान योजना के लिए केंद्र और राज्यों के बीच फंड शेयरिंग पैटर्न वर्तमान में 8 पूर्वोत्तर राज्य अर्थात्: अरुणाचल प्रदेश, मेघालय, असम, मणिपुर, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम तथा 3 हिमालयी राज्य अर्थात्: जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के लिए 90:10 के अनुपात में है। विधानमंडल वाले अन्य सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए यह 60:40 है। बिना विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के लिए 100% केंद्र प्रायोजित है।

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