जानिए NRC क्या है?

NRC का फुल फॉर्म: नेशनल सिटीजन रजिस्टर (NRC), एक रजिस्टर है जिसमें सभी वास्तविक भारतीय नागरिकों के नाम हैं। वर्तमान में, केवल असम में ही ऐसा रजिस्टर है। सरकार ने हाल ही में कहा हैं कि नेशनल सिटीजन रजिस्टर (NRC) किसी भी संप्रभु देश के लिए एक आवश्यक है और भारत के कानून के अनुसार इसे लागु होना चाहिए। सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नागरिकता संशोधन अधिनियम को चुनौती देने वाली याचिकाओं के बैंच के सामने जवाब के रूप में हलफनामा दायर किया हैं।

प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह और कई अन्य वरिष्ठ मंत्रियों ने कई मौकों पर स्पष्ट किया है कि कोई भी राष्ट्रव्यापी NRC की घोषणा नहीं की गई है। आज हम NRC से जुड़ी सभी जानकारी प्रदान कर रहे हैं जो आपको जानना आवश्यक है।

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नेशनल सिटीजन रजिस्टर(NRC) क्या हैं? ?

वर्ष 1951 में, सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर, NRC से असम के सभी अवैध अप्रवासियों की पहचान की गयी थी। जब से इसे असम में लागू किया गया था, तब से इसके राष्ट्रव्यापी कार्यान्वयन की मांग बढ़ रही थी। अब, सरकार के कई शीर्ष मंत्री जैसे गृह मंत्री अमित शाह सहित नेताओं ने प्रस्ताव दिया है कि असम में लागु NRC को पुरे देश में लागू किया जाए। ऐसे में सरकार को इसपर एक कानून लाने का सुझाव दिया गया, जो सरकार को ऐसे लोगों की पहचान करने में मदद करेगा जो भारत में अवैध रूप से रह रहे हैं और उन्हें वहां भेज दें, जहां से वे आएं हैं।

कोई अपनी नागरिकता कैसे साबित कर सकता हैं?

असम में, नागरिकता साबित करने के लिए बुनियादी मानदंडों में से एक यह था कि आवेदक के परिवार के सदस्यों का नाम या तो 1951 में तैयार पहले एनआरसी में होना चाहिए या 24 मार्च, 1971 तक मतदाता सूची में होना चाहिए। 
इसके अलावा, लोगों के पास शरणार्थी पंजीकरण प्रमाण पत्र, जन्म प्रमाण पत्र, एलआईसी पॉलिसी, भूमि या किरायेदारी रिकॉर्ड, नागरिकता प्रमाण पत्र, पासपोर्ट, सरकार द्वारा जारी लाइसेंस या प्रमाण पत्र, बैंक या डाकघर खाते, स्थायी आवासीय प्रमाण पत्र, शैक्षणिक प्रमाण पत्र और अदालत के रिकॉर्ड, सरकारी रोजगार प्रमाण पत्र, जैसे दस्तावेज पेश करने का विकल्प भी था।

इसके बाहर के व्यक्तियों के साथ क्या होगा??

“NRC में किसी व्यक्ति का नाम शामिल न होने का मतलब यह नहीं हैं की वह व्यक्ति विदेशी घोषित है”, सरकार ने कहा है कि ऐसे व्यक्तियों को फॉरेन ट्रिब्यूनल के समक्ष अपना केस पेश करने का अवसर दिया जाएगा। यदि कोई इस मामले को ट्रिब्यूनल में हार जाता है, तो व्यक्ति उच्च न्यायालय और फिर, उच्चतम न्यायालय में जा सकता है।
असम में, राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह किसी को भी तब तक हिरासत में नहीं लेगा, जब तक कि उसे फॉरेन ट्रिब्यूनल द्वारा विदेशी घोषित नहीं किया जाता है।

वे लोग क्या कर सकते हैं, यदि वे अपने वसीयत का डाटा नहीं ढूढ़ पाने में असमर्थ हो?

सरकार ने असम के हर जिले में एनआरसी सेवा केंद्र स्थापित किए हैं, जो लोगों को उनके वसीयत की डेटा की खोज करने, वसीयत का डेटा कोड जारी करने और एनआरसी के आवेदन पत्र  को प्राप्त करने में सहायता करते हैं।

क्या NRC किसी धर्म विशेष के लोगों के लिए होगा?

NRC का किसी भी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। NRC भारत के सभी नागरिकों के लिए है। यह एक रजिस्टर है, जहां हर नागरिक के नाम दर्ज किए जाएंगे।

क्या लोगों को धर्म के आधार पर NRC में बाहर रखा जाएगा?

NRC का किसी भी धर्म से कोई लेना-देना नहीं है। जब भी एनआरसी लागू किया जाएगा, यह धर्म के आधार पर लागू नहीं किया जाएगा। किसी को सिर्फ इस आधार पर बाहर नहीं किया जाएगा कि वह किसी धर्म विशेष का अनुसरण करता है।

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