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क्या है नया APMC एक्ट: APMC मार्केट और परमिट के बारे में विस्तार से जानें

एग्रीकल्चर प्रोड्यूस मार्किट कमिटी: अधिनियम के सरल होने से किसान बिचौलियों के बिना सीधे बेच सकेंगे और किसानों के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार स्थापित करने के लिए सभी बाजारों को e-NAM से जोड़ा जायेगा, ताकि वे बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें।

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APMC का पूर्ण रूप Agricultural Produce Market Committee (कृषि उपज बाजार समिति) है, इस की स्थापना प्रत्येक राज्य की राज्य सरकार द्वारा किसानों को उनकी कृषि उपज बेचने के लिए एक मंच प्रदान करने के लिए की गई थी। इस तरह की समितियां यह सुनिश्चित करती है कि लालची बिचौलिये, किसानों को उनकी कृषि उपज की कम देकर ख़रीदकर उनका शोषण न करें और बाद में उन्हें अधिक कीमतों पर नहीं बेचें। किसानों को अपने उत्पादों का लाभ कभी नहीं मिला और इस प्रक्रिया में वे अधिक ऋण लेने के लिए मजबूर होते थे। APMC मार्केटिंग पहल ने विभिन्न राज्यों में किसानों की मदद की है।

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किसानों की दुर्दशा को सुधारने के लिए 1950 के दशक में APMC की शुरुआत के माध्यम से सरकार ने एक बदलाव लाया। जिसे यह सुनिश्चित करना था कि:

  • किसानों का शोषण नहीं हो।
  • किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके।

APMC ने इसके स्थापना के वर्णित दो कारणों के अलावा किसानों को कई लाभ प्रदान किए, जैसे 

  • किसानों और खरीदारों दोनों को सुविधा प्रदान करने के लिए मार्केट यार्ड का विकास
  • भंडारण की सुविधा जैसे गोदाम आदि उपलब्ध कराती है।
  • किसान बाज़ारों की व्यवस्था की, ताकि किसान अपनी उपज सीधे उपभोक्ताओं को बेच सकें।
  • मूल्य में उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने में मदद की।
  • यह किसान की उपज की नीलामी की सुविधा प्रदान करता है

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APMC बाजार में परिचालन के मुद्दे:

  • किसान को apmc परमिट का आवश्यकता होना
  • बाजार में उसका एक दुकान या गोदाम का मालिक होना
  • विकल्पों की एक सीमित संख्या का होना और महंगा होना
  • बिचौलियों द्वारा अधिक निवेश किया जाना
  • वेटमैन(तोलकार), पैडलर्स और हमालों को बाजार में काम करने के लिए लाइसेंस लेना
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इसने लाइसेंस प्राप्त करने अर्थात्: APMC परमिट और APMC बाजार में दुकान प्राप्त करने के लिए रिश्वत देने की प्रथा शुरू कर दी।

पिछले APMC अधिनियम की समस्याएं थीं:

  • नियमित चुनाव नहीं होते हैं और इसलिए ज्यादातर नौकरशाहों द्वारा चलाए जाते हैं।
  • बाजार में होने वाले लेनदेन, बाजार कर के साथ-साथ उपकर के अधीन थे।

हालाँकि कई उपायों ने कुछ मुद्दों को सुधारने के लिए निम्नलिखित के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित कर दिया:

  • अनाज
  • दलहन
  • तिलहन की फसलें

लेकिन फल और सब्जियां इस समर्थन मूल्य के अंतर्गत नहीं आती थी।

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नये APMC एक्ट में :

  • किसान अब इसे APMC बाजार में लाए बिना सीधे किसान-उत्पाद को बेच सकते हैं।
  • किसी भी खरीदार को, जिसे वह चाहता है, को बेचने का अधिकार है,
  • यदि किसान APMC बाजार में नहीं बेचता है, तो उसे APMC चुनाव लड़ने का मौका नहीं मिलेगा और APMC विपणन समिति का हिस्सा नहीं होगा
  • अन्य किसान, निर्यातक, ग्रेडर, प्रोसेसर, पैकर्स अब सीधे किसानों से खरीद सकते हैं और APMC बाजार में जाने की जरूरत नहीं है।
  • राज्य के एकाधिकार को नीचे लाया जाएगा और निजी यार्डों को चलाने का मार्ग प्रशस्त किया जाएगा
  • निजी यार्ड के लिए परमिट दिए जाएंगे।
  • किसानों को अपनी उपज का व्यापार करने और बेचने के लिए डायरेक्ट-खरीद केंद्र होंगे
  • ऐसे बाजारों के प्रबंधन और विकास में सार्वजनिक-निजी भागीदारी की अनुमति दी गयी है।
  • कोल्ड स्टोरेज के बेहतर हैंडलिंग के लिए, किसान की उपज के लिए पैकहाउस को प्री-कूलिंग की सुविधा दी गयी है।
  • APMC की जिम्मेदारियां बढ़ायी गयी है

अधिनियम के सरल होने से किसान बिचौलियों के बिना सीधे बेच सकेंगे और किसानों के लिए एकीकृत राष्ट्रीय बाजार स्थापित करने के लिए सभी बाजारों को e-NAM से जोड़ा जायेगा, ताकि वे बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें।

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