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भारत के गवर्नर जनरल की सूची : यहाँ देखें महत्वपूर्ण गवर्नर जनरल के शासनकाल की महत्वपूर्ण जानकारियां

भारत के गवर्नर जनरल की सूची : सभी गवर्नर जनरल संबंधी सभी जानकारी यहाँ देखें। परीक्षा में अधिकतम मार्क्स पाने के लिए GA सेक्शन से जुड़े तथ्यों की जानकारी होना काफी महत्वपूर्ण हैं। इसी को ध्यान में रखकर हम भारत के गवर्नर जनरल(List of Governor-Generals of India) का स्टडी नोट्स लेकर आयें हैं जिसमें ब्रिटिश शासन के समय भारत में आये महत्वपूर्ण गवर्नर जनरल और उनसे जुडी महत्वपूर्ण जानकारी को कवर किया हैं। इसे हमने रेलवे और SSC की परीक्षा पर ध्यान केंद्रित करते हुए तैयार किया है।

         

भारत के गवर्नर जनरल की सूची(List of Governor General of India)

सर रॉबर्ट क्लाइव

  • वह बंगाल के पहले और आखिरी गवर्नर थे। वे दो बार बंगाल के गवर्नर रहे।
  • उन्होंने बंगाल में दोहरी सरकार या “द्वैध शासन” की अवधारणा शुरू की।
  • उन्हें बंगाल के किंगमेकर के रूप में जाना जाता था।
  • 1772 में इंग्लैंड वापस लौटने के बाद उन्होंने आत्महत्या कर ली।

वारेन हेस्टिंग्स (1772-1785)

  • वारेन हेस्टिंग्स बंगाल(फोर्ट विलियम की प्रेसीडेंसी) के पहले गवर्नर थे। 1750 में वह एक क्लर्क के रूप में ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी में शामिल हो गए और भारत के लिए रवाना हुए, अगस्त 1750 में कलकत्ता पहुंचे।
  • 1781 में, उन्होंने इस्लामी अध्ययन को बढ़ावा देने के लिए कलकत्ता मदरसा की स्थापना की।
  • उन्होंने 1784 में विलियम जोन्स के साथ एशियाटिक सोसाइटी ऑफ बंगाल की स्थापना की।
  • जमींदारों को न्यायिक शक्तियाँ दी गईं; प्रत्येक जिले में दीवानी और फौजदारी अदालतों की स्थापना की।
  • इसके शासन में:- (i) दोहरी सरकार की अवधारणा और द्वैध शासन बंगाल में समाप्त हो गया। (ii) सर्वोच्च न्यायालय कलकत्ता (1774) में स्थापित हुआ जिसमें कुल 4 जज थे।
  • इनके कार्यकाल के दौरान, “चार्ल्स विल्किंस” द्वारा गीता का अंग्रेजी में अनुवाद किया गया था।
  • भारत का पहला समाचार पत्र “बंगाल गजट” 1780 में “मिस्टर जेम्स हिक्की” द्वारा शुरू हुआ।
  • द्वितीय आंग्ल-मैसूर युद्ध लड़ा गया।

लॉर्ड कार्नवालिस (1786-1793)

  • बंगाल का स्थायी बंदोबस्त (जिसे जमींदारी व्यवस्था भी कहा जाता है) की शुरुआत की। यह ईस्ट इंडिया कंपनी और बंगाली जमींदारों के बीच जमीन से होने वाले राजस्व को तय करने के लिए एक समझौता था।
  • भारत में सिविल सेवाओं की शुरूआत की।
  • उन्होंने पुलिस सुधारों की शुरुआत की जिसके अनुसार प्रत्येक जिले को 400 वर्ग मील में विभाजित किया गया और इसे एक पुलिस अधीक्षक के अधीन रखा गया।
  • तीसरा आंग्ल-मैसूर युद्ध शुरू हुआ (1789-1792)।

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लॉर्ड वेलेस्ली (1798-1805)

  • उन्होंने भारतीय शासकों को नियंत्रण में रखने और अंग्रेजों को सर्वोच्च शक्ति बनाने की प्रणाली- सहायक गठबंधन(Subsidiary Alliance) की नीति अपनाई।
  • उन्होंने कलकत्ता में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की।
  • उन्होंने कलकत्ता में कंपनी के सर्वेंट को प्रशिक्षित करने के लिए कॉलेज खोला। इसलिए, इन्हें भारत में सिविल सेवा के जनक के रूप में जाना जाता है।

सर जॉर्ज बार्लो(1805-1807)

  • पहला सिपाही विद्रोह – ड्रेस कोड के मुद्दे पर “सिपाहियों का विद्रोह” वर्ष 1806 में वेल्लोर (तमिलनाडु) में हुआ था। हालाँकि यह विद्रोह बहुत छोटा था और कुछ ही दिनों में अंग्रेजों द्वारा दबा दिया गया था।

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लॉर्ड मिंटो प्रथम(1807-1813)

  • उन्होंने महाराजा रणजीत सिंह के साथ वर्ष 1809 में अमृतसर की प्रसिद्ध संधि पर हस्ताक्षर किए जिसके बाद यह निर्णय लिया गया कि सिख साम्राज्य सतलुज नदी तक केंद्रित होगा।
  • उन्होंने 1813 का चार्टर अधिनियम पारित किया। इसके तहत: (a) अंग्रेजों ने भारत में शिक्षा के लिए हर साल 1 लाख रुपये देने का फैसला किया। (b) चाय और अफीम के व्यापार को छोड़कर अंग्रेजों का व्यापार एकाधिकार भारत में समाप्त हो गया और चीन के साथ व्यापार शुरू हुआ।

लॉर्ड हेस्टिंग्स(1813-1823)

  • उन्होंने अहस्तक्षेप(non-intervention) की नीति को समाप्त कर दिया, जिसका अनुसरण सर जॉन शोर ने किया।
  • उन्होंने प्रेस की सेंसरशिप को समाप्त कर दिया। बॉम्बे में रैयतवारी और महालवारी प्रणाली की शुरुआत की।

लॉर्ड एमहर्स्ट(1823-1828)

  • उनका कार्यकाल प्रथम आंग्ल बर्मी युद्ध (1824-26) और बैरकपुर के विद्रोह (1824) के लिए जाना जाता था।

लॉर्ड विलियम बेंटिक (1828-1835)

  • उन्होंने राजाराम मोहन राय की मदद से सती प्रथा के उन्मूलन जैसे सामाजिक सुधार किए साथ ही , ठगी का दमन किया।
  • कलकत्ता में प्रथम मेडिकल कॉलेज की स्थापना की।
  • उन्होंने लॉर्ड मैकाले (भारत न्यायिक प्रणाली के जनक) की सलाह पर वर्ष 1835 में “अंग्रेजी” को भारत की आधिकारिक भाषा घोषित किया।
  • उन्होंने 1833 का चार्टर अधिनियम पारित किया। इसके शासन काल में:- (a) भारत में अंग्रेजों का व्यापारिक एकाधिकार पूरी तरह से समाप्त हो गया। (b) बंगाल के गवर्नर जनरल का पद समाप्त हो गया और भारत के गवर्नर जनरल की शुरुआत हुई। इस प्रकार वे पहले “भारत के गवर्नर जनरल” बने।
  • उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या और बाल बलि का भी दमन किया।

सर चार्ल्स मेटकाफ(1835-1836)

  • उन्होंने अस्थायी रूप से पद संभाला और वर्नाक्युलर प्रेस पर प्रतिबंध हटा दिया और प्रेस को स्वतंत्र बनाया। इसके कारण उन्हें “भारत में प्रेस के मुक्तिदाता” के रूप में जाना जाता है। हालांकि, उन्हें उनके पद से हटा दिया गया था।

लॉर्ड ऑकलैंड(1836-1842)

  • उसके शासनकाल में पहला अफगान युद्ध लड़ा गया था।

लॉर्ड डलहौजी(1848-1856)

  • 1853 में बॉम्बे से ठाणे के लिए पहली रेलवे लाइन शुरू की।
  • 1853 में कलकत्ता से आगर तक पहली टेलीग्राफ लाइन शुरू की।
  • उन्होंने भारत का पहला डाक टिकट (1854) जारी किया।
  • उन्होंने भारत में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की शुरुआत की।
  • उन्होंने रुड़की में पहला इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू किया। (वर्तमान में आईआईटी रुड़की)
  • उन्होंने शिमला को ग्रीष्मकालीन राजधानी बनाया।
  • उन्होंने “ईश्वर चंद्र विद्यासागर” के प्रयासों पर “विधवा पुनर्विवाह अधिनियम” 1856 पारित किया।
  • व्यपगत के सिद्धांत को लाया तथा सतारा (1848), जयपुर और संभलपुर (1849), उदयपुर (1852), झांसी (1853), नागपुर (1854) पर कब्जा कर लिया।
  • कई पुलों का निर्माण किया गया और ग्रैंड ट्रंक रोड शुरू किया।
  • डाक प्रणाली की स्थापना की जिससे संचार आसान हो गया।
  • विधवा पुनर्विवाह विधेयक पारित हुआ।
  • 1854 में वुड्स डिस्पैच पारित नियुक्त गया, जिसने स्कूल से विश्वविद्यालय तक शिक्षा की उचित व्यवस्था प्रदान की।
लॉर्ड कैनिंग (1856 – 1862)
  • भारत में वर्ष 1857 में कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में 3 विश्वविद्यालय स्थापित किए।
  • “बंगाल के बैरकपुर” में मंगल पांडे नामक एक सैनिक द्वारा सिपाहियों का विद्रोह(1857 का विद्रोह) ​हुआ।
  • 1859 में “दिगंबर विश्वास और बिष्णु चरण विश्वास” द्वारा बंगाल में नील विद्रोह या नील दर्पण हुआ था।
  • 1861 में एएसआई (ASI → भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण की शुरुआत ​हुई।
  • उन्होंने भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Council Act) पारित किया। इसके तहत ब्रिटिश वायसराय के पास भारत में आपातकाल घोषित करने की शक्ति होती है और आपातकाल के दौरान उसके पास बिना किसी की अनुमति के कोई भी नया कानून पारित करने की शक्ति होती है।

लॉर्ड एल्गिन I (1862-1864)

  • 1862 में भारत में कलकत्ता, बॉम्बे और मद्रास में तीन उच्च न्यायालय स्थापित किए गए।

Sir John Lawrence (1864-1869)

  • उन्होंने भारतीय वन विभाग की शुरुआत 1865 में की।
    उन्होंने टेलीग्राफिक संचार को यूरोपीय देशों तक बढ़ाया।

लॉर्ड मेयो (1869-1872)

  • “मोहन दास करमचंद गांधी” का जन्म 2 अक्टूबर, 1869 को पोरबंदर में “करमचंद गांधी” और “पुतली बाई” के शाही परिवार में हुआ था।
  • लॉर्ड मेयो ने भारत की पहली जनगणना(1871) की थी।
  • उन्होंने भारत में कृषि और वाणिज्य विभाग शुरू किया।
  • उन्होंने भारत का सांख्यिकीय सर्वेक्षण (SSI) शुरू किया जो बाद में (ISI) (इंडिया स्टैटिस्टिकल इंस्टीट्यूट) बन गया।
  • उन्होंने अजमेर में प्रसिद्ध “मेयो कॉलेज” और गुजरात में राजकोट कॉलेज भारतीय राजकुमार और राजकुमारी के लिए शुरू किया।
  • 1872 में अंडमान में “शेर अफरीदी” नामक एक पठान द्वारा अपने कार्यकाल के दौरान मारे जाने वाले वे एकमात्र वायसराय थे।
लॉर्ड लिटन (1876-1880)
  • उन्हें viceroy of the reverse character के रूप में जाना जाता है।
  • “1877” का “द ग्रैंड दिल्ली दरबार” रानी विक्टोरिया के स्वागत के लिए स्थापित किया गया था जहाँ उन्हें “कैसर-ए-हिंद” (भारत की रानी) की उपाधि दी गई थी।
  • श्री गोपाल हरि देशमुख 1877 के भव्य दिल्ली दरबार के दौरान खादी के कपड़े पहनते हैं।
  • लॉर्ड लिटन ने 1878 में “वर्नाक्यूलर प्रेस, एक्ट” के माध्यम से प्रेस पर सभी प्रतिबंधों को फिर से लागू कर दिया।
  • उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा क्वालीफाई करने के लिए भारतीयों के लिए अधिकतम आयु 21 से घटाकर 18 वर्ष कर दी।
  • उन्होंने आर्म्स एक्ट 1878 पारित किया। इसके तहत हथियार रखने के लिए लाइसेंस हासिल करना अनिवार्य था।
  • उन्होंने 1876 में “सर रिचर्ड स्ट्रैची” के अंतर्गत “अकाल आयोग” नियुक्त किया और उन्होंने किसानों के करों को माफ करके राहत भी दी।.
लॉर्ड रिपन (1880 – 1884)
  • उन्होंने पहला कारखाना अधिनियम, 1881 पारित किया, इसके तहत भारत में बाल श्रम पर प्रतिबंध लगा दिया गया था।
  • उन्होंने इल्बर्ट बिल, 1883 पारित किया, इसके तहत भारतीय न्यायाधीशों को यूरोप के अपराधियों को सजा देने की शक्ति मिली लेकिन बाद में इस विधेयक को अंग्रेजों ने वापस ले लिया।
  • उन्होंने भारत में माध्यमिक स्तर की शिक्षा में सुधार के लिए 1882 में शिक्षा आयोग की नियुक्ति की, जिसे “हंटर कमीशन” के रूप में जाना जाता है।
  • उन्होंने 1882 में स्थानीय स्वशासन अधिनियम पारित किया, इसके तहत भारत में पंचायती राज व्यवस्था शुरू हुई। यही कारण है कि उन्हें “पंचायती राज के जनक” या स्थानीय स्वशासन के जनक के रूप में जाना जाता है।
लॉर्ड डफरिन (1884-1888)
  • कुल 72 सदस्यों के साथ श्री ए ओ ह्यूम द्वारा गोकुल दास तेजपाल संस्कृत महाविद्यालय, बॉम्बे में वर्ष 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (आईएनसी) का गठन हुआ।
लॉर्ड लैंसडाउन(1888-1894)
  • इनके शासन में दूसरा कारखाना अधिनियम 1891 पारित हुआ जिसमें :- (i) श्रमिकों के लिए साप्ताहिक अवकाश (रविवार की छुट्टी) था। (ii) काम करने की निश्चित समय अवधि थी। (iii) उन्होंने भारत और अफगानिस्तान के बीच राजनीतिक सीमा खींचने के लिए 1893 में उच्च स्तरीय डूरंड आयोग की नियुक्ति की, जो (अब पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच हैं।
  • वर्ष 1892 में, उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा को 3 भागों में विभाजित किया: – (a) शाही सेवाएं → आईएएस (b) प्रांतीय सेवाएं → राज्य पीसीएस (c) अधीनस्थ सेवाएं → तहसीलदार
  • 1893 में → स्वामी विवेकानंद जीरो पर शिकागो में भाषण दिए।
  • दक्षिण अफ्रीका में प्रसिद्ध सेंट पीटरमैरिट्सबर्ग रेलवे स्टेशन पर गांधीजी को ट्रेन से बाहर फेंक दिया गया था।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

Q. भारत में सिविल सेवा के जनक कौन थे?

उत्तर- लॉर्ड कार्नवालिस

Q. डॉक्ट्रिन ऑफ लैप्स(Doctrine of Lapse) को किसने लाया?

उत्तर- लॉर्ड डलहौजी

Q. भारत की पहली जनगणना किसने की?

उत्तर- लॉर्ड मेयो

Q. भारत के पहले गवर्नर जनरल कौन थे?

उत्तर- लॉर्ड विलियम बेंटिक

Q. भारत का पहला डाक टिकट किसने जारी किया ?

उत्तर- लॉर्ड डलहौजी

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