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जानिए, डीएनए क्या है?

डीएनए या डीऑक्सीराइबोन्यूक्लिक एसिड अणुओं का एक समूह है, जो माता-पिता से वंशानुगत गुणों या आनुवंशिक जानकारी को उनके संतानों तक ले जाने और स्थानांतरित करने के लिए जिम्मेदार होता है। एक बहुकोशिकीय जीव के लगभग प्रत्येक कोशिका में उस जीव के लिए आवश्यक डीएनए का पूरा सेट होता है। यह सभी प्रकार के जीवों में आनुवंशिकता की प्राथमिक इकाई के रूप में भी कार्य करता है। यहाँ इस आर्टिकल में, हम डीएनए की खोज, संरचना और कार्य के बारे में विस्तार से बताएंगे।

डीएनए क्या है?

जैसा कि पहले बताया गया है, डीएनए अणुओं का एक समूह है जो वंशानुगत जानकारियों को एक से दूसरे में पहुँचाने  करने के लिए जिम्मेदार होता है। दूसरे शब्दों में, डीएनए एक लंबा अणु है, जिसमें किसी व्यक्ति का अद्वितीय आनुवंशिक कोड होता है। यह हमारे शरीर द्वारा कार्य करने के लिए आवश्यक प्रोटीन के निर्माण के लिए निर्देश देता है। डीएनए, माता-पिता से एक बच्चे में आता हैं, जिसमें लगभग आधे बच्चे का डीएनए, पिता से और आधा माँ से होता है।

डीएनए, कोशिका के माइटोकॉन्ड्रिया में उपस्थित होता है और इसे माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए कहा जाता है। यह मां से बच्चे को विरासत में मिलता है। मनुष्यों में, माइटोकॉन्ड्रियल डीएनए के लगभग 16,000 बेस युग्म होते हैं।

डीएनए के प्रकार

डीएनए, तीन प्रकार के होते हैं::

  • A-DNA:  A- DNA B- DNA के समान दायीं ओर कुंडलित होता है। निर्जलित डीएनए A प्रकार का होता है, जो चरम स्थितियों के दौरान डीएनए की रक्षा करता है। प्रोटीन बाइंडिंग भी डीएनए से विलायक को हटाता है और A प्रकार का डीएनए बनाता है। 
  • B-DNA:  यह सबसे आम डीएनए का प्रकार है; और दायीं ओर कुंडलित होता है। B प्रकार के अधिकांश डीएनए की बनावट सामान्य शारीरिक स्थितियों के अनुसार होती है।
  • Z-DNA: जेड-डीएनए, बायीं ओर का डीएनए होता है, जहां जिग-ज़ैग पैटर्न में बायीं ओर द्विकुंडलित घुमाव होता है। यह जीन के प्रारंभिक स्थल से आगे पाया जाता है और इसलिए माना जाता है कि यह जीन के नियमन में कुछ भूमिका निभाता है। जेड-डीएनए की खोज एंड्रेस वांग और अलेक्जेंडर रिच ने की थी।

डीएनए की खोज

डीएनए की खोज एक स्विस जीवविज्ञानी, जोहन फ्रेडरिक मिशर ने वर्ष 1869 में की थी। डीएनए अणु के दोहरे कुंडलित ढांचे को बाद में जेम्स वाटसन और फ्रांसिस क्रिक द्वारा प्रयोगात्मक डेटा के माध्यम से खोजा गया। बाद में, यह साबित हो गया कि डीएनए, एक मनुष्य की आनुवंशिक जानकारी को संग्रहीत करने के लिए जिम्मेदार होता है।

डीएनए की संरचना

डीएनए में सूचना को चार रासायनिक आधारों:- एडेनिन, ग्वानिन, थाइमिन और साइटोसिनसे बने एक कोड के रूप में संग्रहीत किया जाता है। मनुष्यों के डीएनए में लगभग 3 बिलियन बेस होते हैं, और 99 प्रतिशत से अधिक आधार सभी लोगों में समान होते हैं। इन बेस का अनुक्रम या क्रम, किसी जीव के निर्माण और बनाए रखने के लिए उपलब्ध जानकारी को तय करता है, यह उसी प्रकार होता है, जिस प्रकार वर्णमाला के अक्षर एक निश्चित क्रम में शब्द और वाक्य बनाने के लिए दिखाई देते हैं।
डीएनए संरचना के तीन घटकों में, शुगर, डीएनए अणु का आधार बनाता है। इसे डीऑक्सीराइबोस भी कहा जाता है। विपरीत स्ट्रेंड्स के नाइट्रोजनस बेस हाइड्रोजन बॉन्ड बनाते हैं, जिससे सीढ़ी जैसी संरचना बनती है।
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डीएनए के कार्य

डीएनए एक अजेंटिक पदार्थ है, जो सभी वंशानुगत जानकारियों को वहन करता है, जिसे उसके नाइट्रोजन आधारों की व्यवस्था में कोडित किया जाता है। जीन, डीएनए का छोटा भाग होता हैं। जिनमें 250 – 2 मिलियन बेस युग्म होते हैं, जो जीन पर निर्भर करते हैं। पॉलीपेप्टाइड अणु के लिए एक जीन कोड, जहां तीन नाइट्रोजनीस बेस हो, एक एमिनो एसिड को व्यक्त करता हैं।

जीन के अनुक्रम का उपयोग पॉलीपेप्टाइड बनाने के लिए किया जाता है, जो फिर प्रोटीन बनाता है। चूंकि, प्रत्येक जीव के डीएनए में कई जीन होते हैं, इसलिए विभिन्न प्रकार के प्रोटीन बन सकते हैं। प्रोटीन, जीवों में मुख्य कार्यात्मक और संरचनात्मक अणु हैं। आनुवांशिक जानकारी संग्रहीत करने के अलावा, डीएनए के कार्य में यह भी शामिल हैं:

  • प्रतिकृति प्रक्रिया: एक कोशिका से उसकी बेटियों तक और एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक आनुवांशिक जानकारी को स्थानांतरित करना 
  • कोशिका विभाजन के दौरान डीएनए का समान वितरण
  • उत्तराधिकार
  • प्रतिलिपिकरण(ट्रैन्स्क्रिप्शन)
  • DNA फिंगरप्रिंटिंग(अंगुली-छाप)
  • कोशिकीय चयापचय
  • जीन थेरेपी

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