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भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की सूची; अभी तक निर्वाचित प्रधानमंत्रियों की सूची

भारत का प्रधानमंत्री: केंद्र में सत्तारूढ़ सरकार का प्रमुख होता हैं। सभी प्रभावी कार्यकारी शक्ति, प्रधान मंत्री की अध्यक्षता वाली मंत्रिपरिषद के पास रहती है। उसके बाद उस राजनीतिक दल के नेता को लोकसभा (संसद के निचले सदन) में भारत के प्रधान मंत्री के रूप में नियुक्त किया जाता है। प्रधानमंत्री की नियुक्ति औपचारिक रूप से राष्ट्रपति द्वारा की जाती है। भारत के पहले प्रधान मंत्री जवाहर लाल नेहरू को 15 अगस्त 1947 को नियुक्त किया गया था और नरेंद्र दामोदरदास मोदी भारत के वर्तमान प्रधान मंत्री हैं। केवल एक अपडेट के लिए, द्रौपदी मुर्मू 21 जुलाई 2022 को भारत की 15वीं राष्ट्रपति बन गई हैं।

Prime Minister of India

भारत के प्रधान मंत्री, संसद सत्र के बैठकों और कार्यक्रमों की तारीखों का निर्धारण करते हैं। वे यह भी तय करते हैं कि सदन को कब स्थगित या भंग करना है। मुख्य प्रवक्ता के रूप में, वह प्रमुख सरकारी नीतियों की घोषणा करते हैं और उसपर के सवालों के जवाब देते हैं। स्वतंत्रता के 72 वर्षों में, भारत में 18 बार प्रधानमंत्री बदले हैं। भारत के सभी प्रधानमंत्रियों की सूची नीचे दी गई है:

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जवाहरलाल नेहरु(1947-1964)

जवाहरलाल नेहरू भारत के पहले और अब तक के सबसे लंबे समय तक सेवा करने वाले प्रधानमंत्री थे। वे भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में एक अग्रणी व्यक्ति थे और 1964 में अपनी मृत्यु तक प्रधान मंत्री के रूप में कार्य करते रहें। लोकप्रिय रूप से बच्चों के प्रति उनके प्रेम के कारण वे ‘चाचा नेहरू’ के रूप में जाने जाते हैं।उन्हें उनकी कश्मीरी पंडित समुदाय से जुडाव के कारण ‘पंडित नेहरू‘ भी कहा जाता है।

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लाल बहादुर शास्त्री (1964-1966)

कांग्रेसी लाल बहादुर शास्त्री भारत के दूसरे प्रधानमंत्री थे। उन्होंने “जय जवान जय किसान” का नारा दिया, जो 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान लोकप्रिय हुआ और इन्होने जवाहरलाल नेहरू के अधीन रेल मंत्री के रूप में कार्य किया। औपचारिक रूप से युद्ध समाप्त करने के ताशकंद समझौते के बाद उनका निधन हुआ।


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गुलजारीलाल नंदा(1964, 1966)

गुलजारीलाल नंदा ने 1966 में भारत के कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में 13 दिनों के लिए लाल बहादुर शास्त्री की मृत्यु के बाद पदभार संभाला था। भारत के दूसरे प्रधान मंत्री के रूप में उनके पहली 13-दिवसीय कार्यावधि, 1964 में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद हुई।


इंदिरा गाँधी(1966-1977, 1980-1984)

भारत की तीसरी प्रधान मंत्री, इंदिरा प्रियदर्शिनी गांधी, जो भारत की पहली और अब तक की एकमात्र महिला प्रधान मंत्री हैं, ने एक प्रधानमंत्री के रूप में दूसरी सबसे लंबी अवधि तक सेवा की। इंदिरा गांधी ने विदेश मंत्री (1984), रक्षा मंत्री (1980 – 82), गृह मामलों के मंत्री (1970 – 73) और सूचना और प्रसारण मंत्री (1964 – 66) के रूप में भी कार्य किया। उसने चुनाव स्थगित करने के लिए 1975 में राष्ट्रीय आपातकाल लागू कर दिया। पूर्वी पाकिस्तान के स्वतंत्रता के लिए पाकिस्तान के साथ 1971 का युद्ध उनके कार्यकाल के दौरान हुआ था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के बाद, 1986 में अपने ही अंगरक्षक द्वारा उसकी हत्या कर दी गई थी।


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मोरारजी  देसाई(1977-79)

भारत के चौथे प्रधानमंत्री मोरारजी रणछोड़जी देसाई थे। वह 1952 से 1956 तक, बॉम्बे राज्य के मुख्यमंत्री थे, जिसका विभाजन महाराष्ट्र और गुजरात में हुआ था। उन्होंने जनता पार्टी द्वारा गठित सरकार का नेतृत्व किया। वे भारत और पाकिस्तान,दोनों से सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार भारत रत्न और निसान-ए-पाकिस्तान पाने वाले एकमात्र भारतीय हैं।


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चौधरी  चरण सिंह (1979-80)

चौधरी चरण सिंह भारत के पांचवें प्रधानमंत्री थे। उत्तर प्रदेश में एक किसान परिवार में जन्मे चरण सिंह, किसानों के अधिकारों के हिमायती थे। लोकसभा में बहुमत साबित करने से पहले, इंदिरा गांधी ने चरण सिंह की सरकार को समर्थन वापस ले लिया, और सत्ता में सिर्फ 23 दिनों के बाद, उन्होंने इस्तीफा दे दिया। भारत की कृषि संबंधी चिंताओं में उनके योगदान के कारण, नई दिल्ली में इनके स्मारक का नाम किसान घाट है।


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 राजीव  गाँधी (1984-89)

भारत के छठे प्रधान मंत्री, राजीव गांधी ने 1984 से 1989 तक सेवा की। उन्होंने सिख दंगों के बाद 1984 में इंदिरा गांधी की हत्या के दिन पदभार ग्रहण किया और 40 वर्ष की आयु में भारत के सबसे युवा पीएम थे। उन्होंने इंडियन एयरलाइंस के पायलट के रूप में काम किया। 1985-91 तक वे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रहे


 वीपी सिंह (1989-1990)

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वीपी सिंह भारत के सातवें प्रधानमंत्री थे। वीपी सिंह उत्तर प्रदेश के 12 वें मुख्यमंत्री थे। 1984 से 1987 तक, वह वित्त मंत्री थे और 1989-90 तक पीएम राजीव गांधी के अधीन रक्षा मंत्री थे, जब बोफोर्स घोटाला सामने आया था। सरकारी पदों/शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण के लिए मंडल आयोग की रिपोर्ट उनके कार्यकाल में लागू की गई थी।


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चंद्रशेखर (1990-1991)

आठवें भारतीय प्रधान मंत्री, चंद्र शेखर ने चुनाव प्रक्रिया न कराने के लिए कांग्रेस के समर्थन से जनता दल के एक वोट केअल्पमत के समय सरकार का नेतृत्व किया। कम से कम पार्टी के सांसदों के साथ, उनकी सरकार को ‘लेम डक‘ माना जाता था। 1991 के आर्थिक संकट और राजीव गांधी की हत्या उनके कार्यकाल के दौरान की दो प्रमुख घटनाएं थीं।


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पीवी नरसिम्हा राव(1991-1996)

10 वें प्रधान मंत्री, पामुलापर्थी वेंकट नरसिम्हा राव, दक्षिणी भारत से आने वाले पहले पीएम थे। नरसिम्हा राव ने 1993-96 तक रक्षा मंत्री और 1992 से 1994 तक विदेश मंत्री के रूप में कार्य किया। वह 1986 में राजीव गांधी के अधीन गृह मंत्री भी रहे। नरसिम्हा राव आंध्र प्रदेश के चौथे मुख्यमंत्री भी थे। 1991 के आर्थिक सुधारों को पीएम के रूप में उनके कार्यकाल में लाया गया।


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एच. डी. देवगौड़ा (1996-1997)

11 वें भारतीय पीएम, हरदनहल्ली डोड्डेगौड़ा देवेगौड़ा ने 1994 से 1996 तक कर्नाटक के मुख्यमंत्री का पद संभाला था। देवेगौड़ा को प्रधानमंत्री चुना गया था, जब किसी भी पार्टी ने सरकार बनाने के लिए पर्याप्त सीटें नहीं जीती थीं और संयुक्त मोर्चा ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बनाई थी। जनता दल (सेकुलर) के राष्ट्रीय अध्यक्ष, देवेगौड़ा प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के बाद 14 वीं, 15 वीं और 16 वीं लोकसभा के सदस्य थे।


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 इंद्र कुमार गुजराल(1997-1998)

भारत के 12 वें प्रधान मंत्री, आई के गुजराल, गांधी जी नेतृत्व वाले भारत छोड़ो आंदोलन में भाग लिए थे। विदेश मंत्री के रूप में, उन्हें भारत की विदेश नीति को अपने निकटवर्ती पड़ोसी, विशेष रूप से पाकिस्तान के साथ मार्गदर्शन करने के लिए पांच सिद्धांतों का एक सेट -गुजराल सिद्धांत के लिए याद किया जाता है। वे राज्यसभा और लोकसभा दोनों के सदस्य थे।.


अटल बिहारी वाजपेयी (1996, 1998-99, 1999-2004)

अटल बिहार वाजपेयी ने भारत के प्रधान मंत्री के रूप में तीन कार्यकाल में सेवा दी हैं। वह पहली बार भारत के 10 वें प्रधानमंत्री के रूप में चुने गए और केवल 13 दिनों की अवधि के लिए सेवा की। एक लोकप्रिय प्रधानमंत्री, अटल बिहारी वाजपेयी को 2014 में सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार, भारत रत्न से सम्मानित किया गया था। उन्होंने “जय जवान, जय किशन, जय विज्ञान” का नारा दिया। 25 दिसंबर को क्रिसमस के दिन, उनके जन्मदिन को भारत में सुशासन दिवस के रूप में मनाया जाता है।


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डॉ. मनमोहन सिंह (2004-2014)

डॉ. मनमोहन सिंह भारत के 13 वें प्रधानमंत्री थे। उन्होंने प्रधान मंत्री के रूप में दो कार्यकाल पुरे किये और दो बार यूपीए सरकारों का नेतृत्व किया। राज्य सभा के एक सदस्य के रूप में, मनमोहन सिंह 1998 से 2004 तक उच्च सदन के नेता थे। वह वर्तमान में अपने छठे राज्य सभा कार्यकाल की सेवा कर रहे हैं। मनमोहन सिंह, भारतीय रिजर्व बैंक के 15 वें गवर्नर भी थे।


नरेंद्र दामोदरदास मोदी (2014-वर्तमान)

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भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नरेंद्र मोदी, सरकार के प्रमुख के रूप में चुने गए हैं। वह निचले सदन (लोकसभा) के नेता हैं और मंत्रिपरिषद के प्रमुख भी हैं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी भारत के 14 वें प्रधान मंत्री हैं। वे अपने दूसरे कार्यकाल में सेवारत है। पीएम मोदी, पहली बार 2014 में 16 वीं लोकसभा के लिए चुने गए।

 

भारत के प्रधान मंत्री: पात्रता मापदंड 

भारत के प्रधान मंत्री के पद के लिए पात्र होने के लिए, एक व्यक्ति के लिए आवश्यक है कि वह :

  • भारत का नागरिक हो।
  • लोकसभा या राज्यसभा में से किसी एक का सदस्य हों।
  • 25 वर्ष की आयु पूरी किया हो, यदि वह लोकसभा का सदस्य है; या 30 वर्ष आयु पूरा किया हो, यदि वह राज्यसभा का सदस्य है।

वह व्यक्ति भारत का प्रधानमंत्री नहीं हो सकता है यदि वह भारत सरकार के अधीन या, किसी राज्य की सरकार के अधीन या किसी स्थानीय या अन्य प्राधिकारी के अधीन किसी भी लाभ के पद पर हो।

भारत के प्रधान मंत्री: चयन प्रक्रिया

संविधान में कहा गया है कि भारत के राष्ट्रपति को उस दल या गठबंधन के नेता को भारत के प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त करना चाहिए जो लोकसभा में बहुमत में हो। यदि कोई पार्टी या गठबंधन बहुमत प्राप्त नहीं करता है, तो राष्ट्रपति प्रधान मंत्री के रूप में सबसे बड़ी पार्टी या गठबंधन के नेता की नियुक्ति करता है। उसे संसद के निचले सदन में विश्वास मत जीतना होता है। लोकसभा या राज्यसभा में से किसी एक सदस्य को प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया जा सकता है। यदि वह संसद के किसी भी सदन का सदस्य नहीं है, तो उसे अपनी नियुक्ति के छह महीने के भीतर सदन के लिए निर्वाचित होना होगा। प्रधान मंत्री के रूप में, वे सदन के नेता होते हैं, जिसके वे सदस्य हैं।

भारत के प्रधान मंत्री: भूमिकाएं और दायित्व

प्रधानमंत्री की भूमिकाएं और दायित्व इस प्रकार हैं:

  • राष्ट्रपति और मंत्रिपरिषद के बीच की कड़ी के रूप में
  • विभागों का आवंटन करना
  • मंत्रालयों का प्रभार
  • कैबिनेट के नेता
  • संसद और मंत्रिमंडल के बीच की कड़ी के रूप में
  • आधिकारिक प्रतिनिधि
  • प्रधानमंत्री किसी भी सदस्य को इस्तीफा देने के लिए कह सकता है या किसी मंत्री को हटाने के लिए राष्ट्रपति से सिफारिश कर सकता है।

भारत के प्रधान मंत्री: वेतनमान

भारत के संविधान के अनुच्छेद 75 के अनुसार, प्रधानमंत्री का वेतन संसद द्वारा तय किया जाता है और समय-समय पर संशोधित किया जाता है। 31 जुलाई 2012 को भारत के प्रधान मंत्री का मासिक वेतन और भत्ता 1,60,000 रुपये थे।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्रियों को दी जाती है::

  • जीवन भर के लिए मुफ्त आवास
  • चिकित्सा सुविधाएं, 14 सचिवीय कर्मचारी, कार्यालय के खर्च के साथ वास्तविक खर्च, छह घरेलू एक्सक्यूटिव श्रेणी के फ्लाइट टिकट और अनेक सुविधाएँ
  • पहले पांच वर्षों के लिए मुफ्त ट्रेन यात्रा
  • एक वर्ष के लिए SPG सुरक्षा

पांच साल बाद: एक निजी सहायक और चपरासी, मुफ्त हवाई और रेल टिकट और 6,000 रु. कार्यालय खर्च के लिए।

भारत के प्रधान मंत्री: कार्यकाल और सेवानिवृत्ति का समय

प्रधान मंत्री का निश्चित कार्यकाल नहीं होता है। प्रधानमंत्री का पूरा कार्यकाल पांच साल का होता है, जो लोकसभा के साथ जुड़ा होता है। हालाँकि, यह जल्द ही समाप्त हो सकता है यदि वह निचले सदन में विश्वास मत खो देता है। प्रधानमंत्री राष्ट्रपति को पत्र लिखकर भी इस्तीफा दे सकते हैं। प्रधान मंत्री बनने के लिए कोई टर्म की सीमा नहीं है। कोई आधिकारिक सेवानिवृत्ति की आयु भी नहीं है।

भारत का प्रधानमंत्री : FAQs

Q. भारत के राष्ट्रपति बनने के लिए किसी की न्यूनतम आयु सीमा क्या है?
Ans. उम्मीदवार की उम्र 25 वर्ष है, यदि वह लोकसभा का सदस्य है;यदि वह राज्यसभा का सदस्य है तो 30 वर्ष।

Q. प्रधानमंत्री को कौन नियुक्त करता है?

Ans. प्रधान मंत्री को राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है और प्रधान मंत्री की सलाह पर अन्य मंत्रियों को राष्ट्रपति द्वारा नियुक्त किया जाता है।

Q. प्रधान मंत्री की सेवानिवृत्ति की आयु क्या है?
Ans. प्रधान मंत्री बनने के लिए कोई टर्म की सीमा नहीं है। कोई आधिकारिक सेवानिवृत्ति की आयु भी नहीं है।

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